नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुछ दिन पहले ही चीन के दौरे पर थे और वहां राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उनका भव्य स्वागत किया था। इसके बाद भी लगता है चीन पर शायद इसका कोई असर नहीं पड़ा। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) द्वारा आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के सरगना सैयद सलाहुद्दीन पर बैन लगवाने की भारत की कोशिशों में अड़ंगा लगा दिया है।
खबर है कि चीन ने धमकी दी है कि वह इस मामले में तकनीकी पेंच फंसा देगा। कई अड़चनों पर खुलकर बात हुई है और यूएन में भारत को स्थायी सदस्य बनाने के लिए चीन ने विचार करने को भी कहा था। लेकिन, चीन के इस कदम से साफ हो गया है कि दोनों देशों के रिश्ते अभी यूएन में दोस्ती तक नहीं पहुंच पाए हैं।
वैसे भी, अगर भारत को सलाहुद्दीन पर बैन लगवाना है, तो उसे यूएनएससी के 15 सदस्य देशों के समर्थन की खासी जरूरत होगी। एनएससी के प्रस्ताव 1267 के मुताबिक, सलाहुद्दीन की यात्राओं पर बैन और उसकी संपत्तियों की कुर्की के लिए सदस्य देशों की मंजूरी बेहद जरूरी है।
सूत्रों के मुताबिक, चीन सलाहुद्दीन पर बैन लगाने की भारत की अर्जी पर यह कहकर रोड़ा अटकाना चाहता है कि उसे इस मामले में और तथ्य चाहिए जिनसे यह साबित हो सके कि सलाहुद्दीन का संबंध अल कायदा से है।
चर्चा यह भी है कि चीन अपने फैसले पर दोबार विचार कर भारत का साथ दे सकता है, लेकिन भारत को फिक्र है कि चीन से हो रहे विरोध के चलते उसकी कोशिशें पटरी से उतर सकती हैं। भारत यह भी जानता है कि यूएन का स्थायी सदस्य होने की वजह से चीन के पास वीटो का भी अधिकार है। चीन ने पहले भी इसका इस्तेमाल पाकिस्तान के खिलाफ उठाए गए भारत के कदमों को निष्क्रिय करने के लिए किया है।
यह बात किसी से छुपी नहीं है कि पाकिस्तान को चीन अपना दोस्त मानता है। पाकिस्तान की खुशी के लिए चीन भारत की तमाम कोशिशों पर वीटो लगाकर पानी फेर चुका है। अगर सलाहुद्दीन पर यूएन के प्रस्ताव 1267 के तहत बैन लग जाता है तो उसकी यात्रा और संपत्तियों तक पहुंच सीमित हो जाएगी।