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तीसरे विश्व युद्ध की घंटी बजते ही जापान ने दूना कर दिया देश का रक्षा बजट, निशाने पर आया चीन

रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते बदलते वैश्विक सामरिक परिवेश में तीसरे विश्वयुद्ध की आहट ने खतरे की घंटी बजा दी है। ऐसे में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से शांत पड़ा जापान सबसे अधिक सक्रिय हो गया है। इस वक्त दुनिया के सबसे बड़े प्रतिद्वंदी देशों में चीन बनाम अमेरिका, रूस बनाम अमेरिका और जापान बनाम चीन की स्थिति पैदा हो गई है।

Written By: Dharmendra Kumar Mishra @dharmendramedia
Published : Feb 01, 2023 04:41 pm IST, Updated : Feb 01, 2023 11:42 pm IST
फुमियो किशिदा, जापान के प्रधानमंत्री- India TV Hindi
Image Source : AP फुमियो किशिदा, जापान के प्रधानमंत्री

नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते बदलते वैश्विक सामरिक परिवेश में तीसरे विश्वयुद्ध की आहट ने खतरे की घंटी बजा दी है। ऐसे में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से शांत पड़ा जापान सबसे अधिक सक्रिय हो गया है। इस वक्त दुनिया के सबसे बड़े प्रतिद्वंदी देशों में चीन बनाम अमेरिका, रूस बनाम अमेरिका और जापान बनाम चीन की स्थिति पैदा हो गई है। इधर रूस और चीन मिलकर अमेरिका को पस्त करना चाहते हैं तो वहीं जापान और अमेरिका मिलकर चीन और रूस की हेकड़ी निकालना चाहते हैं।

चीन इस वक्त दुनिया का सुपर पॉवर बनने का सपना देख रहा है। इसलिए उसकी सबसे बड़ी प्रतिद्वंदिता अमेरिका से है। वह अमेरिका को आकाश से लेकर पाताल तक धरती से लेकर समुद्र तक घेरने में जुट गया है। चीन अमेरिका की बादशाहत को खत्म करना चाहता है। जबकि अमेरिका विश्व के लिए खतरा बनते चीन की हर हाल में बर्बादी चाहता है तो वहीं जापान भी चीन को घुटने पर लाना चाहता है। इसलिए वर्चस्व की सबसे बड़ी जंग शुरू हो गई है। जापान के निशाने पर चीन है।

जापान के सैन्य बजट को नाटो ने सराहा

जापान ने विश्व युद्ध के खतरे को देखते हुए अपने देश के रक्षा बजट पर सबसे अधिक फोकस किया है। जापान अभी तक अपनी कुल जीडीपी का 1 फीसदी रक्षा पर खर्च करता रहा है, लेकिन पहली बार उसने अपने रक्षा बजट को जीडीपी का 2 फीसदी कर दिया है। इन दिनों जापान का सबसे बड़ा दुश्मन चीन है। दक्षिण चीन सागर में जापान और चीन के बीच बड़ी जंग छिड़ी है। चीन जहां समुद्र में दादागीरी दिखाकर जापान को धमका रहा है तो वहीं जापान चीन को उसकी औकात में लाना चाहता है। इसलिए द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अचानक जापान का जज्बा जाग उठा है। प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने देश के रक्षा बजट को जीडीपी का 2 फीसदी करने का ऐलान करके पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। नाटो ने जापान के रक्षा बजट में दोगुनी बढ़ोत्तरी होने पर सराहना की है। नाटो के प्रमुख जेंस स्टोल्टेनबर्ग ने बुधवार को अपने रक्षा खर्च को दोगुना करने की जापान की योजना की सराहना करते हुए कहा कि प्रतिज्ञा एक अस्थिर दुनिया में अधिक सुरक्षा भागीदारी के लिए देश के संकल्प को दर्शाती है।

अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर फोकस
अपने देश की रक्षा के साथ ही साथ जापान को फोकस अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को भी लेकर है। नाटो प्रमुख जेंस स्टोल्टेनबर्ग ने टोक्यो में कहा कि सुरक्षा पर जापान के नए सिरे से ध्यान ने राष्ट्र को "शांति के लिए" भागीदार के रूप में "और भी अधिक" सक्रिय बना दिया है। "मुझे खुशी है कि जापान रक्षा के लिए समर्पित सकल घरेलू उत्पाद के 2 प्रतिशत के नाटो बेंचमार्क तक पहुंचने के लिए (एक सैन्य बजट) योजना बना रहा है। दशकों से जापान ने जीडीपी के लगभग एक प्रतिशत पर सैन्य खर्च को सीमित कर दिया था, लेकिन पिछले साल के अंत में प्रधान मंत्री फुमियो किशिदा की सरकार ने एक नई सुरक्षा रणनीति को मंजूरी दी है। इसमें वित्तीय वर्ष 2027 तक रक्षा खर्च को जीडीपी के दो प्रतिशत तक बढ़ाने की योजना शामिल है। स्टोलटेनबर्ग ने कहा, "यह दर्शाता है कि जापान अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीरता से लेता है।"

जापान को चीन और उत्तर कोरिया से खतरा
जापान को सबसे बड़ा खतरा चीन और उत्तर कोरिया से है। इन दोनों देशों से बढ़ते खतरों के साथ-साथ यूक्रेन पर रूस के हमले ने जापान में अधिक सैन्य खर्च के लिए सार्वजनिक समर्थन को बढ़ावा दिया है। स्टोलटेनबर्ग ने कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने "यूक्रेन को पूरी तरह से कम करके आंका"। मगर यूक्रेन का समर्थन करने में नाटो सदस्यों के बीच मजबूत एकता देखी गई। स्टोलटेनबर्ग ने कहा, "आज, जिस वैश्विक व्यवस्था ने इतने दशकों तक हमारी इतनी अच्छी तरह से सेवा की है, वह खतरे में है।

सत्तावादी और विस्तारवादी मंशा में मॉस्को और बीजिंग सबसे आगे हैं। उन्होंने कहा, "अधिक खतरनाक होती दुनिया में जापान अपने साथ खड़े होने के लिए नाटो पर भरोसा कर सकता है।" स्टोलटेनबर्ग ने मंगलवार को किशिदा से मुलाकात की और कहा कि बाद में वे चीन, उत्तर कोरिया और यूक्रेन युद्ध से सुरक्षा खतरों के सामने "एकजुट और दृढ़ रहने" के लिए सहमत हुए थे।

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