कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित कर अस्थायी समिति की रिपोर्ट का समर्थन किया जिसमें विधान परिषद के गठन की बात कही गई है। वहीं, विपक्षी बीजेपी ने इसका विरोध किया है। राज्य के विधायी मामलों के मंत्री पार्थ चटर्जी ने सदन के कामकाज को संचालित करने की प्रक्रिया के नियम 169 के तहत प्रस्ताव ‘विधान परिषद के गठन के लिए अनुशंसा पर गौर करने की खातिर अस्थायी समिति की रिपोर्ट पर विचार’ को पेश किया।
विधान परिषद् के गठन के समर्थन के लिए मतदान हुआ जिसका सदन में मौजूद 265 सदस्यों में से 196 ने समर्थन किया और 69 ने विरोध किया। प्रस्ताव का विरोध करते हुए बीजेपी विधायक दल ने कहा कि टीएमसी पिछले दरवाजे की राजनीति करना चाहती है ताकि विधानसभा चुनावों में हारने के बावजूद नेता निर्वाचित हो जाएं।
भगवा दल ने यह भी कहा कि इस कदम से राज्य के राजस्व पर दबाव पड़ेगा। बीजेपी के सुर में सुर मिलाते हुए आईएसएफ के एकमात्र विधायक नौशाद सिद्दिकी ने भी प्रस्ताव का विरोध किया। बता दें कि अब इसे संसद के दोनों सदनों यानी लोकसभा और राज्यसभा से पास कराना होगा। इसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी भी जरूरी है।
बंगाल में 1952 में विधान परिषद का गठन किया था, जो कि 1969 तक जारी रहा, लेकिन दूसरी संयुक्त मोर्चा सरकार ने एक विधेयक पारित करके उच्च सदन को समाप्त कर दिया था। गौरतलब है कि इस समय देश के केवल छह राज्यों में विधान परिषद है, जिनमें बिहार, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक शामिल है।
बंगाल में 294 विधानसभा सीटें हैं। चूंकि एक विधान परिषद में सदस्यों की संख्या विधानसभा के सदस्यों से एक तिहाई से अधिक नहीं हो सकती है, इसलिए बंगाल में विधान परिषद में 98 सदस्य हो सकते हैं।
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