China & Tibet: वर्ष 1954 में भारत का अहम हिस्सा रहे तिब्बत पर कब्जा करने के बाद से चीन लगातार वहां सड़कों का जाल बिछाता आ रहा है। चीन ने तिब्बत से लेकर आक्साईचिन और देश के दूसरे इलाकों में सड़कों और इंफ्रास्ट्रक्चर की झड़ी लगा दी है।
अमेरिका और चीन के रिश्तों में पिछले कुछ महीनों से तल्खी का दौर जारी है और इसमें सुधार होने की कोई उम्मीद भी नजर नहीं आ रही है।
Tibetan President Penpa Tsering on Tawang Clash: हिंदुस्तान को 1962 वाला भारत समझकर चीन बड़ी गलती कर रहा है। भारत ने दशकों में काफी विकास कर लिया है और उसे धमकाया नहीं जा सकता। मगर चीन को यह बात समझ नहीं आ रही। अरुणाचल प्रदेश के तवांग में 9 दिसंबर को भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई भिड़ंत के बाद तिब्बत का बयान।
Tibet-China News: वैसे तो चीन हर मामले में तिब्बत से सैकड़ों कदम आगे है। मगर अब एक मामले में तिब्बत ने चीन को पीछे छोड़कर सबको हैरान कर दिया है। तिब्बत की इस कामयाबी से चीन भी परेशान है। हालत यह है कि लगातार सात वर्षों तक पीछा करने के बाद भी चीन इस मामले में तिब्बत के आसपास भी नहीं पहुंच पाया।
धारग्ये और रिग्त्से तिब्बत की सेरशुल काउंटी के एक मठ में रहते थे जहां उनके साथ लगभग 250 और लोगों का बसेरा था।
दलाई लामा ने अपने बयान में कहा था कि कड़े सामाजिक नियंत्रण के प्रति सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी का झुकाव नुकसानदेह हो सकता है।
तोक्यो फॉरेन कॉर्सपोंडेंट्स क्लब की मेजबानी वाले ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस में दलाई ने कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने की उनकी कोई खास योजना नहीं है।
अमेरिका के एक प्रभावशाली सांसद ने कहा कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का पिछले सप्ताह तिब्बत के दौरे पर जाना भारत के लिए एक खतरा है।
चीन ने युवा तिब्बतियों को पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) और स्थानीय मिलिशिया में भर्ती करने के प्रयासों को तेज कर दिया है।
चीन ने तिब्बत के सुदूर हिमालयी क्षेत्र में पहली पूरी तरह बिजली से संचालित बुलेट ट्रेन का शुक्रवार को परिचालन शुरू किया जो प्रांतीय राजधानी लहासा और नियंगची को जोड़ेगी।
चीनी सरकार द्वारा जारी एक आधिकारिक श्वेत पत्र में दावा किया गया कि किंग राजवंश (1677-1911) के बाद से केंद्र सरकार द्वारा दलाई लामा और अन्य आध्यात्मिक बौद्ध नेताओं को मान्यता दी जाती है। दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि प्राचीन समय से ही तिब्बत चीन का अविभाज्य हिस्सा है।
लद्दाख में LAC के पास चले सीमा विवाद और तनातनी के बाद सीमा पर सैनिक कम करके चीन, भारत के साथ दोस्ती की बातें कर रहा है लेकिन अपनी चालबाजियों से बाज नहीं आ रहा है। तनातनी के बाद चीन भारत को एक और झटका देने की तौयारी कर रहा है।
साल 2016 में भारत सरकार द्वारा अपनाई गई हालिया नीतियों के चलते तिब्बत की निर्वासित सरकार के बारे में लोगों को कम पता है। इस पर सभी को प्रयास करने की जरूरत है। सर्वेक्षण के दौरान लोगों से बातचीत करते वक्त पता चला कि लगभग 75 फीसदी लोगों को इस बारे में बिल्कुल भी कोई जानकारी नहीं है।
चीन ने अरूणाचल प्रदेश में भारतीय सीमा के पास तिब्बत के ल्हासा और नयींगशी शहरों को जोड़ने के लिए रेल पटरी बिछाने का काम गुरुवार को पूरा कर लिया।
तिब्बत की निर्वासित सरकार ने नई तिब्बत नीति पर हस्ताक्षर करने के लिए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आभार प्रकट किया है।
तिब्बत में चीन के कथित दमनकारी प्रशासन की आलोचना करते हुए अमेरिका के एक शीर्ष राजनयिक ने अन्य देशों से अपील की है कि वे अमेरिका के उस कानून जैसा ही कानून अपने यहां भी बनाएं जिसके तहत तिब्बत में विदेशी लोगों की यात्राओं पर रोक लगाने वाले चीनी अधिकारियों को अमेरिका में प्रवेश देने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
चीन ने तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर एक बड़ा बांध बनाने की अपनी योजना के बारे में बृहस्पतिवार को कहा कि इस परियोजना को लेकर किसी तरह से चिंतित होने की जरूरत नहीं है और नदी के निचले प्रवाह क्षेत्र वाले देशों-भारत तथा बांग्लादेश- के साथ बीजिंग का ‘अच्छा संवाद’ जारी रहेगा।
केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (सीटीए) के प्रतिनिधियों को चुनने के लिए अगले वर्ष जनवरी में होने वाले चुनाव में मतदान करने की खातिर करीब 80,000 लोगों ने पंजीकरण कराया है।
तिब्बत की निर्वासित सरकार के प्रमुख डॉक्टर लोबसांग सांगाय ने 6 दशक में पहली बार व्हाहट हाउस का दौरा किया और तिब्बत मामलों के लिए नवनियुक्त अमेरिकी अधिकारी से मुलाकात की।
प्रस्ताव में तिब्बत और तिब्बत के लोगों की वास्तविक स्वायत्तता और 14वें दलाई लामा द्वारा वैश्विक शांति, सद्भाव और तालमेल को बढ़ावा देने के लिए किए गए कार्यों के महत्व को मान्यता दी गई है।
संपादक की पसंद
लेटेस्ट न्यूज़