मां बच्चे को 9 महीने तक अपने गर्भ में पालती है और उसके बाद बच्चा इस दुनिया में आता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बच्चा मां के गर्भ के बिना भी पैदा हो सकता है?
ब्रिटेन में वैज्ञानिकों ने इंसानी DNA को कृत्रिम रूप से बनाने की दिशा में एक अनोखा प्रयोग शुरू किया है। इसका उद्देश्य बीमारियों के इलाज में क्रांति लाना है, लेकिन इस तकनीक को लेकर नैतिक चिंताएं भी तेजी से उभर रही हैं।
वैज्ञानिकों ने रिसर्च रिपोर्ट में बताया है कि पृथ्वी से ऑक्सीजन खत्म हो जाएगा और ऐसे में जीवन भी समाप्त हो जाएगा। वैज्ञानिकों ने इस दावे से संबंधित रिपोर्ट जारी की है। जानिए इस रिपोर्ट में क्या है?
वैज्ञानिकों ने पृथ्वी जैसे जीवन की संभावना वाले एक नए ग्रह की खोज की है। इस ग्रह को HD 20794 d नाम दिया गया है। यह ग्रह एक ऐसे तारे की परिक्रमा कर रहा है, जो सूर्य के समान है।
अफ्रीका महाद्वीप में तेजी से बदलाव देखा जा रहा है। पूर्वी अफ्रीका में दो प्रमुख टेक्टोनिक प्लेट्स- न्युबियन और सोमालियाई, एक-दूसरे से दूर जा रही हैं।
टिम फ्रीडे नाम के शख्स ने बीते 18 सालों में सैकड़ों बार सांप से कटवाया है और उनके खून में विकसित एंटीबॉडीज अब वैज्ञानिकों को नया एंटीवेनम बनाने में मदद कर रही हैं। रीसर्च अगर कामयाब होता है तो कई सांपों के जहर को बेअसर करने वाली दवाएं बनाने में मदद मिलेगी।
प्रशांत महासागर में करोड़ों साल पहले घटी महत्वपूर्ण घटना पर शोध कर रहे वैज्ञानिकों को इसके कारणों से जुड़ा सुराग लग गया है। इसे बारे में जानकर वैज्ञानिक भी हैरान हैं।
भारतीय मूल के 10 वर्षीय एक लड़के ने दुनिया के मशहूर वैज्ञानिक अलबर्ट आइंस्टीन और स्टीफन हॉकिंग्स से भी ज्यादा आईक्यू स्कोर हासिल करके पूरी दुनिया को चौंका दिया है। इस छात्र ने मेन्सा आईक्यू में 162 अंक हासिल किए हैं।
वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह पर पानी का विशाल भंडार होने का पता लगाया है। यह वैज्ञानिकों की अब तक की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है। वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह के एक क्रिस्टल से पता लगाया है कि ग्रह के निर्माण के समय से ही उस पर पानी मौजूद है।
वैज्ञानिकों ने पृथ्वी की तरह ही एक नए ग्रह की खोज की है जिसपर जीवन की संभावना जताई गई है। पृथ्वी के समान द्रव्यमान वाला यह चट्टानी ग्रह, तारामंडल में धनु राशि में एक सफेद बौने जैसा चारों ओर घूमता है।
अगर आप भी 100 साल तक एक सेहतमंद जिंदगी जीना चाहते हैं, तो आपको आज से ही अपने डेली रूटीन में कुछ टिप्स को फॉलो करना शुरू कर देना चाहिए।
दक्षिण अफ्रीका के वैज्ञानिकों ने बड़ी बात कही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्होंने ‘सील’ में रेबीज के प्रकोप की पहचान की है। वैज्ञानिक अब यह पता लगाने की कोशिश में जुटे हैं कि रेबीज सील तक कैसे पहुंचा।
दक्षिण कोरिया में सुसाइड करने वाले रोबोट को लेकर सूत्रों के हवाले से एक बहुत बड़ा दावा किया जा रहा है। दक्षिण कोरिया की बड़ी टेक्नॉलोजी कंपनी में काम करने वाले एक अधिकारी के हवाले से सूत्रों ने इंडिया टीवी को इस घटना के सत्य होने का दावा किया है। सूत्रों ने बताया कि वैज्ञानिकों ने एआइ कमांड देने में गलती कर दी थी।
इंसानों के शराबी होने की घटना तो हर जगह आम हो चली है। मगर ऑस्ट्रेलिया में कई शराबी तोते पकड़े गए हैं, जो इंसानों की तरह अपनी उत्तेजना बढ़ाने और मौज-मस्ती करने के लिए एल्कोहल का सेवन करते हैं। पक्षियों की इन प्रवृत्तियों से वैज्ञानिक भी हैरान हैं।
क्या बड़ा दिमाग बुद्धिमान होने की निशानी है अगर ऐसा है तो बड़े दिमाग वाले आदि मानव भोजन क्यों नहीं खोज पाते थे। मस्तिष्क का आकार बढ़ना किस बात की निशानी है, इस वैज्ञानिकों ने नया और दिलचस्प अध्ययन किया है।
वैज्ञानिकों ने 155 मिलियन वर्ष पुराना स्टारफिश जैसा जीव ढूंढ निकाला है जो खुद का क्लोन बना लेता है। यह दिखने में जेलीफिश जैसा है और इसकी छह भुजाएं हैं। जानिए इस जीव के बारे में-
वैज्ञानिकों के अनुसार सूर्य की उम्र 5 अरब वर्ष के करीब है। अभी तक वह 4.6 अरब वर्ष की आयु पूरी कर चुका है। ऐसे में उसका समय पूरा होने पर जब सूरज की मौत होगी तो वह फट जाएगा। ऐसे में सुपरनोवा विस्फोट से धरती पर जीवन विलुप्त होने की आशंका है।
वैज्ञानिकों ने आकाश गंगा में तारों के सबसे पुराने समूह का पता लगाकर सबको हैरान कर दिया है। खगोलविदों के अनुसार आकाशगंगा छोटी मंदाकिनियों के विलय से बनी, जिससे तारों के बड़े समूहों के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ था। ये तारे 13 अरब वर्ष पुराने हैं।
धरतीवासियों के मंगल ग्रह पर बसने का सपना अब पूरा होने जा रहा है। नासा ने इसके लिए लोगों से आवेदन मांगा है। नासा अपने पहले मार्श मिशन में 1 वर्ष के लिए कुछ लोगों को मंगल ग्रहवासी बनाने जा रहा है। इसमें उसके रहने के लिए 3 डी घर और खाने-पीने की व्यवस्था होगी। मार्श वाक, फसल उत्पादन, व्यायाम कार्य विकसित होंगे।
जीएसएलवी रॉकेट की आखिरी उड़ान 29 मई, 2023 को थी और रॉकेट का कोडनेम 'जीएसएलवी-एफ12' रखा गया था। तार्किक रूप से, अगले जीएसएलवी रॉकेट का क्रमांकन 'जीएसएलवी-एफ13' होना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
संपादक की पसंद
लेटेस्ट न्यूज़