चीनी सेना का शक्तिशाली जासूसी जहाज यूआन वांग 6 एक बार फिर से हिंद महासागर में प्रवेश कर रहा है। चीन के इस जहाज के अचानक से हिंद महासागर में आने से उसकी मंशा को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं।
हिंद महासागर के मध्य हिस्से में मंगलवार को डूबी मछली पकड़ने वाली चीनी नौका पर चीन के 17, इंडोनेशिया के 17 और फिलीपीन के पांच लोग सवार थे।
CCTV ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया और कई अन्य देशों से खोज एवं बचाव दल घटनास्थल पर पहुंचे हैं और चीन ने ऑपरेशन में मदद के लिए दो जहाजों की तैनाती की है।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में विभिन्न देशों के साथ भारत की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी से चीन चिंता में पड़ गया है। अब तक हिंद प्रशांत क्षेत्र में भारत का सहयोग लेने और देने वाले देशों में अमेरिका से लेकर, आस्ट्रेलिया, जापान, कनाडा, फिलीपींस जैसे महत्वपूर्ण देश सामिल हैं।
आस्ट्रेलिया भारत को शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में देखता है। उसे यह भी लगता है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती दादागीरी को रोकने के लिए भारत का साथ जरूरी है। इसलिए वह भारत के साथ रणनीतिक सहयोग को बढ़ाना चाहता है।
चीन के दक्षिण हिंद महासागर में जिन 19 जगहों के नाम बदलने की बात सामने आई है, वे भारतीय प्रायद्वीप से करीब 2000 किलोमीटर दूर हैं। चीनी मीडिया ने इसे बीजिंग का ‘सॉफ्ट पॉव्र‘ प्रोजेक्शन कहा है।
1980 के दशक से भारत गहरे समुद्र में खनन के क्षेत्र में शुरुआती अग्रणी निवेशकों में से एक था। हाल के वर्षों में इस क्षेत्र में भारी प्रगति हुई है।
ऑकस (AUKUS) ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और अमेरिका के बीच एक त्रिपक्षीय सुरक्षा समझौता है। अगर भारत और जापान इस समझौते में शामिल होते हैं तो सदस्य देशों की संख्या पांच हो जाएगी।
Chinese Conspiracy Against India in Ocean: वर्ष 2020 में गलवान में गच्चा खाने के बाद चीन अरुणाचल से लेकर पूर्वी और पश्चिमी लद्दाख तक अपनी पैठ को और भी अधिक मजबूत करता आ रहा है। चीन ने लद्दाख में अब तक 200 से अधिक नए सैनिक शेल्टर बना लिए हैं।
नौसेना उपग्रहों, समुद्री टोही विमानों तथा तटरक्षक एवं उनके जहाजों के सहयोग से भी निगरानी रखती है। लेकिन हिंद महासागर में चीन के जहाजों का आना-जाना सही संकेत नहीं है। नौसेना ने कहा कि वह इस रणनीतिक क्षेत्र में देश के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
Indo-Australia Relationship: पिछले आठ वर्षों में भारत की धाक पूरी दुनिया में बढ़ी है। इसकी वजह देश का नेतृत्व मजबूत हाथों में होने के साथ ही साथ आर्थिक, सामरिक और व्यापार के क्षेत्र में भारत का लगातार बढ़ता हुआ प्रभुत्व है। इसी के मद्देनजर भारत ने अब अपनी समुद्री सीमा क्षेत्र को विस्तार देना चाहता है।
World Power India: भारत को भले ही विकसित देशों की श्रेणी में शुमार होने में अभी वक्त लगेगा, लेकिन उसके बढ़ते वर्चस्व को आज पूरी दुनिया सलाम ठोंक रही है। विश्व की सबसे बड़ी पांचवीं अर्थव्यवस्था बनने के बाद से भारत की धाक दुनिया में और भी अधिक बढ़ गई है।
India Sri Lanka: श्रीलंका के राष्ट्रपति ने कहा है, 'हम यहां ताइवान जैसा कुछ होने नहीं देना चाहते। हम इस क्षेत्र में भारत को वास्तविक सुरक्षा प्रदाता मानते हैं। उसके बाद अन्य देश यहां जितना चाहे रह सकते हैं, लेकिन तब तक ही जब तक उनकी मौजूदगी विभिन्न देशों के बीच तनाव और प्रतियोगिता उत्पन्न न करे।'
जलवायु परिवर्तन धरती पर और भी ज्यादा विनाशकारी होने वाला है जिसका असर भारत पर भी होगा। यह बात संयुक्त राष्ट्र के इंटरगवर्नमेंटल पैनल फॉर क्लाइमेट चेंज (IPCC) की एक नई रिपोर्ट में सामने आई है।
वर्चस्व और दादागिरी दिखाने के मकसद से हिंद महासागर की ओर नजरे गड़ाए बैठे चीन को आज एक बार फिर से मिर्ची लगने वाली है, क्योंकि आज भारत और अमेरिका के बीच हिंद महासागर में दो दिवसीय युद्धाभ्यास शुरू हुआ।
अमेरिकी सरकार ने इंडो-पैसिफिक पर राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी 2018 की संवेदनशील रिपोर्ट को गुप्त सूची से हटा दिया है। चौंकाने वाली बात ये है कि पूर्व में दस्तावेज को 'गुप्त' श्रेणी में रखा गया था और ये विदेशी नागरिकों के लिए नहीं थी।
चीन विश्व शांति के लिए बड़े खतरे के तौर पर उभर रहा है। उसकी नापाक मंशा को भांप ताकतवर देश गोलबंद हो गए हैं। इसी का नतीजा है कि हिंद महासागर क्षेत्र में अभी 120 से ज्यादा युद्धपोत तैनात हैं।
पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ तल्ख सीमा गतिरोध की पृष्ठभूमि में भारतीय नौसेना ने अपने निगरानी अभियानों में वृद्धि करते हुए हिंद महासागर क्षेत्र में परिचालन तैनाती को बढ़ा दिया है।
लद्दाख में जारी तनाव के बीच चीन ने भारतीय उपमहादीप में अपनी परमाणु पनडुब्बी भेज दी है। हालांकि भारत हर मोर्च पर चीन का मुकाबला करने के लिए पहले से तैयार है, जानिए चीन की इस चाल का जवाब कैसे देगा भारत।
गौरतलब है कि एक दिन पहले ही चीनी रक्षा मंत्रालय ने अपने सैन्य विकास पर ‘नये युग में चीन की राष्ट्रीय सुरक्षा’ शीर्षक से एक श्वेत पत्र जारी किया है। इसमें भारत, अमेरिका, रूस एवं अन्य देशों की तुलना में चीन के सैन्य विकास के विभिन्न पहलुओं को छुआ गया है।
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