रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा विकसित एंटी-कोरोना वायरस 2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज (2-डीजी) दवा सोमवार (17 मई) को सुबह 10.30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए लॉन्च की जाएगी।
डीआरडीओ चीफ ने बताया कि उनकी टीम ने कोरोना के चेस्ट इंफेक्शन को पता करने के लिए एक मोबाइल ऐप लॉन्च डवलप की है, जिसमें चेस्ट एक्स-रे की मदद से ये पता लगाया जा सकता है कि कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमित है या नहीं।
DRDO चेयरमैन ने इंडिया टीवी को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में बताया कि मंगलवार 11 मई या 12 मई से उनकी तैयार की हुई anti-COVID drug दवा की कम से कम 10 हजार डोज मार्केट में आ सकती है। इस दवा के लिए DRDO ने फार्मा कंपनी डॉ रेड्डी के साथ करार किया है।
देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट कर जानकारी दी है कि डीआरडीओ आने वाले तीन महीनों में देशभर में 500 ऑक्सीजन प्लांट लगाने जा रहा है। इसके लिए पैसा पीएम केयर्स फंड से दिया जाएगा।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने ठोस ईंधन वाली रैमजेट (एसएफडीआर) मिसाइल प्रणोदन प्रणाली का ओडिशा के चांदीपुर परीक्षण केंद्र से शुक्रवार को सफल उड़ान परीक्षण किया।
इंडियन एयर फोर्स ने आज पोकरण फायरिंग रेंज में सबसे कारगर ध्रुवास्त्र मिसाइल का सफल परीक्षण किया। हेलिकॉप्टर ध्रुव से दागी गई देश में ही विकसित इस मिसाइल ने अपने लक्ष्य पर एकदम सटीक प्रहार कर उसे नष्ट कर दिया।
उत्तराखंड के वैज्ञानिकों को ऋषिगंगा नदी के छह किलोमीटर उपर एक कृत्रिम झील मिली जिसके बारे में अभी यह नहीं मालूम हो सका है कि इस झील से निचले इलाकों में रहने वाली जनसंख्या को कोई खतरा है या नहीं। यह पता लगाने के लिए आईटीबीपी और डीआरडीओ की एक संयुक्त टीम उस स्थान तक पहुंच गयी है।
पड़ोसी मुल्क चीन और पाकिस्तान से निपटने के लिए भारत एक ऐसी मिसाइल विकसित कर रहा है जिससे भारतीय वायुसेना की ताकत काफी बढ़ जाएगी।
अर्जुन मार्क 1A मारक और बचाव क्षमता के लिहाज से विश्वस्तरीय टैंक है। इस टैंक में मुख्य हथियार और सहायक हथियार, दोनों की भूमिका निभाने की क्षमता है। टैंक में उच्च कोटी का इंजन लगा हुआ है।
जमीन से हवा में मार करने वाली मौजूदा आकाश मिसाइल 96 फीसदी स्वदेशी है। ये हवा में 25 किलोमीटर तक मार कर सकती है। इस सिस्टम को भारतीय वायु सेना ने 2014 में और भारतीय सेना ने 2015 में सेवा में शामिल किया था। कैबिनेट ने हाल ही में सिस्टम के निर्यात को मंजूरी दे दी है।
भारत का पहला स्वदेशी 9 एमएम मशीन पिस्तौल संयुक्त रूप से DRDO तथा भारतीय सेना द्वारा विकसित किया गया है
Defence Institute of Physiology & Allied Sciences (DRDO) के डायरेक्टर डॉक्टर राजीव वार्ष्णेय ने बताया कि DRDO ने पूर्वी लद्दाख, सियाचिन और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात भारतीय सेना के लिए 'हिम तपक' (Him Tapak) नामक नई space heating devices बनाई है। यह सुनिश्चित करेगा कि backblast और carbon monoxide poisoning के कारण जवानों की मौत न हो।
रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने आज देश की सुरक्षा को लेकर एक और बड़ी सफलता हासिल की है। DRDO ने भारतीय सेना के लिए सतह से हवा में मध्यम दूरी की वायु मिसाइल प्रणाली का परीक्षण किया है।
डीआरडीओ वैज्ञैनिकों का कहना है कि यह दुनिया की सबसे अच्छी तोप है। इससे भारतीय सेना को और ज्यादा ताकत मिली है। यह तोप भारतीय सेना की 1800 आर्टिलरी गन सिस्टम की जरूरत को पूरा करने में सक्षम है।
रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने क्वांटम की डिस्ट्रिब्यूशन (क्यूकेडी) प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करते हुए बुधवार को अपनी दो प्रयोगशालाओं के बीच संचार का सफल परीक्षण किया।
केंद्र ने रविवार को कहा है कि कोविड-19 महामारी के खिलाफ लड़ाई में दिल्ली सरकार की मदद करने के अपने वादे के तहत उसने डीआरडीओ अस्पताल में 250 वेंटिलेटर पहुंचा दिए हैं।
चीन से तनाव के बीच भारत हर स्तर पर तैयारी कर रहा है। इसी क्रम में पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से निर्मित पिनाका गाइडेड रॉकेट लांच सिस्टम के नए संस्करण का ओडिशा के समुद्री तट पर शुक्रवार को भी सफल परीक्षण किया गया।
भारत ने शुक्रवार को ओडिशा के बालासोर के तट पर 300 किलोमीटर से अधिक तक मार करने वाली पृथ्वी-2 बैलिस्टिक मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। पृथ्वी-2 बैलिस्टिक मिसाइल परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है।
रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर DRDO CEPTAM टियर 2 एडमिट कार्ड जारी कर दिया है। DRDO ने एडवांटेज DRDO CEPTAM 09 A & A भर्ती 2019-20 के तहत वाहन संचालक ‘A’ और फायर इंजन चालक released A ’के पद के लिए एडमिट कार्ड जारी किए हैं।
भारत ने शुक्रवार को नयी पीढ़ी की ऐंटी-रेडिएशन मिसाइल का सफल परीक्षण किया जो भारतीय वायु सेना के रणनीतिक अस्त्र-शस्त्र भंडार में शामिल होगी। डिफेंस रिसर्च ऐंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) के साइंटिस्ट्स ने सुखोई-30 फाइटर जेट से यह मिसाइल छोड़ी।
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