भारत टैक्सी, कैब ड्राइवरों के लिए एक जीरो-कमीशन प्लेटफॉर्म होगा। यानी, जब कोई यात्री अपनी यात्रा के लिए किराये का भुगतान करेगा तो वो पूरा पैसा ड्राइवर की जेब में जाएगा।
इस नए प्लेटफॉर्म के आने से प्राइवेट कैब सर्विस देने वाली कंपनियों को कड़ी टक्कर मिलने की संभावना है। इसकी सबसे खास बात ये है कि इसमें ड्राइवरों को किसी भी तरह का कोई कमीशन नहीं देना होगा।
मुंबई में भारी बारिश के बीच कई कैब ऑपरेटर ने किराया बढ़ा दिया था। इस वजह से लोगों को परेशानी हुई थी। अब 147 कैब ऑपरेटर के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है।
पिछले महीने, केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने इस क्षेत्र के लिए एक व्यापक सहकारी नीति का अनावरण करते हुए संकेत दिया था कि 2025 के अंत तक एक सहकारी कैब सेवा शुरू की जाएगी।
कुछ शहरों में ओला, उबर और ब्लूस्मार्ट के बड़े फ्लीट रैपिडो के लिए चुनौती बनेंगे। एक अन्य एक्सपर्ट के मुताबिक एयरपोर्ट राइड की कीमत आमतौर पर शहरी राइड की तुलना में लगभग दोगुनी होती है।
कैब सेवा प्रदाता ओला और उबर के चालकों ने किराया बढ़ाने, ऋण की किस्त देने की छूट अवधि बढ़ाने सहित विभिन्न मांगों के समर्थन में एक सितंबर से दिल्ली-एनसीआर में हड़ताल पर जाने की धमकी दी है।
ऑनलाइन टैक्सी सेवा देने वाली कंपनी ओला और उबर रविवार को जनता कर्फ्यू की अवधि में अनिवार्य यात्राओं के लिए सीमित सेवा ही चालू रखेंगी।
क्या एप आधारित टैक्सी सेवा देने वाली ओला और उबर के ड्राइवर या चालक इन कंपनियों के कर्मचारी हैं? दिल्ली उच्च न्यायालय में यह सवाल उठा।
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