विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने न्यूयॉर्क दौरे के दौरान बहरीन के समकक्ष अब्दुल्लातिफ से द्विपक्षीय साझेदारी और व्यापार को मजबूत करने के मुद्दे पर वार्ता की है। दोनों नेताओं की बीच यह वार्ता फोन पर हुई है।
भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रूस के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में अपने समकक्ष सर्गेई लावरोव से बृहस्पतिवार को मॉस्को में मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने संवाददातओं के एक सवाल के जवाब में कहा-भारत रूस का बड़ा तेल खरीदार नहीं है।
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर अपनी 3 दिवसीय विदेश यात्रा के क्रम में सिंगापुर पहुंच गए हैं। यहां उन्होंने सिंगापुर के डिप्टी पीएम गन किम योंग के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। इसके बाद वह चीन में होने वाले एससीओ शिखऱ सम्मेलन में शामिल होने बीजिंग जाएंगे।
पीएम मोदी की अर्जेंटीना यात्रा ने दोनों देशों के संबंधों को नई गति प्रदान की है। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की 57 वर्षों में पहली द्विपक्षीय यात्रा थी। अर्जेंटीना पीएम मोदी की इस यात्रा के बाद कई क्षेत्रों में भारत के लिए चीन पर से निर्भरता खत्म करेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टेस्ला के सीईओ एलन मस्क से वाशिंगटन के ब्लेयर हाउस में मुलाकात की। इस दौरान एआई, अंतरिक्ष, नवाचार और प्रौद्योगिकी जैसे मुद्दों पर चर्चा की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने वाशिंगटन दौरे के दौरान अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वाल्ट्ज के साथ बैठक की। पीएम मोदी ने माइक वाल्ट्ज के साथ बैठक को सार्थक बताते हुए एआई और सेमीकंडक्टर समेत रक्षा-सुरक्षा के क्षेत्र में अमेरिकी सहयोग बढ़ने की उम्मीद जताई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नाइजीरिया, ब्राजील और गयाना का यह विदेश दौरा उनके सबसे व्यस्त और सफल विदेश यात्राओं में से एक रहा। पीएम मोदी ने इस दौरान 5 दिन की विदेश यात्रा में दुनिया के 31 नेताओं और संगठनों के मुखिया के साथ द्विपक्षीय वार्ता की।
पीएम मोदी और यूनान के समकक्ष कायरियाकोस मित्सोताकिस की फोन पर अहम वार्ता हुई है। इस दौरान द्विपक्षीय संबंधों पर प्रगति की समीक्षा समेत भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारा समेत कई बड़े मुद्दों पर गहन चर्चा हुई।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से द्विपक्षीय वार्ता के बाद पीएम मोदी ने कहा कि सीमा पर स्थिरता बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है। विश्व शांति और स्थिरता के लिए हमारे संबंध जरूरी हैं।
भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय वार्ता संपन्न हो गई है। राष्ट्रपति जो बाइडेन ने बैठक के बाद एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि भारत और अमेरिका के बीच यह साझेदारी पहले इतिहास के किसी भी समय की तुलना में सबसे ज्यादा मजबूत, घनिष्ठ और गतिशील है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जर्मनी के साथ द्विपक्षीय साझेदारी में अन्य कई बड़ी संभावनाओं पर व्यापक चर्चा की है। ऐसे में माना जा रहा है कि आने वाले समय में जर्मनी भी भारत का रणनीतिक साझेदार हो सकता है।
अमेरिका के साथ भारत अपनी रणनीतिक साझेदारी को लगातार मजबूत कर रहा है। अब रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और अमेरिकी समकक्ष लॉयड ऑस्टिन के बीच वाशिंगटन में रक्षा, सुरक्षा से लेकर औद्योगिक सहयोग जैसे मुद्दों पर व्यापक वार्ता हुई है।
दूतावास ने भारतीयों को नौकरी दिलाने का झूठा झांसा देने वालों के खिलाफ आगाह करते हुए एक परामर्श जारी किया है। जयशंकर ने बैठक के दौरान आसियान और पूर्व एशिया शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता के लिए लाओस को भारत की ओर से पूर्ण समर्थन भी दिया।
चीन ने भारत के खिलाफ रणनीतिक बढ़त हासिल करने के लिए श्रीलंका और नेपाल के रास्ते घुसपैठ का रास्ता लंबे समय से तलाशता रहा है। इसमें वह काफी हद तक सफल भी रहा है। हालांकि श्रीलंका में चीन की दाल बहुत अधिक नहीं गल पाई तो अब वह नेपाल को रिझाने में जुटा है।
बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देने के लिए 2 दिनों की भारत यात्रा पर हैं। उन्होंने पीएम मोदी से व्यापार, ऊर्जा और संपर्क क्षेत्र को लेकर गहन विचार विमर्श किया। दोनों देश तमाम मुद्दों पर एक साथ चलने को सहमत हुए।
इटली में चल रहे 50वें जी 7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मौक्रों ने अलग से द्विपक्षीय वार्ता की। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत और फ्रांस की रणनीतिक साझेदारी को स्थिर व समृद्ध वैश्विक व्यवस्था के लिए और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी7 शिखर सम्मेलन से इतर अपुलिया में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक और यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। इस दौरान उन्होंने कई वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की।
अगर आप भी दुबई जाकर वहां नौकरी करना या बसना चाह रहे हैं तो ये खबर आपके लिए ही है। भारत और यूएई के बीच प्रवासन और आवागमन को आसान बनाने के लिए एक बड़ा समझौता शीघ्र होने जा रहा है। इससे दोनों देशों के आपसी संबंध और प्रगाढ़ होंगे।
ईरान-इजरायल युद्ध की बढ़ती आशंका के बीच भारत-अमेरिका ने अपनी रणनीतिक साझेदारी और सतर्कता पर अधिक फोकस करना शुरू किया है। मध्य-पूर्व के हालात और रूस-यूक्रेन युद्ध के अलावा दक्षिण चीन सागर से लेकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अशांति ने तीसरे विश्वयुद्ध का खतरा बढ़ा दिया है। ऐसे में विदेश सचिव विनय क्वात्रा वाशिंगटन में हैं।
भारत के साथ अमेरिका का लगाव हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ा कारण है। इस क्षेत्र में चीन का मुकाबला करने के लिए अमेरिका को हर हाल में भारत जैसा मजबूत देश चाहिए। इसलिए वह भारत के साथ अपनी दोस्ती को गहरा करना चाहता है।
संपादक की पसंद
लेटेस्ट न्यूज़