आमना रफ़ीक़ इंग्लैंड में रहती हैं और उन्हें क्रिकेट बेहद पसंद है. क्रिकेट ने जो उन्हें दिया है अब वो उसे अगली जनरेशन को सौंपना चाहती हैं.
बीबीसी के अनुसार दरअसल इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड ने दक्षिण एशियाई लड़कियों में क्रिकेट के प्रति रुझान पैदा करने के लिए एक प्रोग्राम शुरु किया है. आमना जब छह साल की थीं तभी से वह अपने बड़े भाई अज़ीम की तरह क्रिकेट खेलना चाहती थीं. उन्होंने अंडर-9, 11 और 13 की लड़को के साथ खेलना शुरु किया.
आमना का कहना है कि किसी को नहीं पता है कि उन्हें कहां भेजना है. आमना ने स्कूल में लड़कियों की टीम बना ली थी. 14 साल की उम्र में वह बार्न्सले में लड़कियों को कोचिंग देने लगीं.
आमना ने कहा, "मुझे एहसास हुआ कि लड़कियां क्रिकेट के प्रति आकर्छित होती हैं लेकिन तभी जब आसपास महिलाएं और लड़कियां हों. ये देखकर मुझे लगा कि मुझे इन लड़कियों के लिए अवसर पैदा करना चाहिए."
आमना अब 22 साल की हैं और लीसेस्टरशायर काउंटी क्रिकेट क्लब के लिए काम करती हैं. आमना ने 'बॉलीक्रिकेट' क्लास शुरु की हैं जहां भांगड़ा संगीत पर एक्सरसाइज़ के बाद सॉफ्ट बॉल से क्रिकेट खेला जाता है.
आमना ने कहा, "लड़कियां बताती हैं कि उन्हें पता ही नहीं था कि क्रिकेट इतना मज़ेदार हो सकता है."
आमना क्रिकेट से जो उन्हें हासिल हुआ है वो उसे दक्षिण एशियाई समुदाय में बांटना चाहती हैं.उनका कहना है कि क्रिकेट आपको एक बेहतर इंसान बनने में मदद करता है.