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Mahashivratri Puja Samagri: महाशिवरात्रि की पूजा में इन 15 सामग्रियों का होना बेहद आवश्यक, शामिल न किया तो पूजा रहेगी अधूरी

महाशिवरात्रि के दिन भक्त भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करने के लिए पूजा अर्चना करते हैं। इस दिन पूजा में किन सामग्रियों का होना आवश्यक होता है, इसके बारे में आज हम आपको जानकारी देने जा रहे हैं।

Written By: Naveen Khantwal
Published : Feb 22, 2025 13:35 IST, Updated : Feb 22, 2025 13:35 IST
Mahashivratri 2025
Image Source : FILE महाशिवरात्रि 2025

महाशिवरात्रि हमारे हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है। इसी दिन माता पार्वती जी और भगवान शिव जी का विवाह हुआ था। महाशिवरात्रि फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस साल यह दिन बुधवार, 26 फरवरी 2025 को है। माना जाता है कि महाशिवरात्रि की रात को भगवान शिव जी और माता पार्वती जी भ्रमण के लिए निकलते है। ऐसे में जो भी भक्त इस रात्रि में भगवान शिव जी की पूजा-अर्चना एवं भजन करते हैं, उन पर भगवान शिव जी और माता पार्वती जी की विशेष कृपा होती है। इसीलिए हमें महाशिवरात्रि की रात भगवान शिव जी का ध्यान और पूजन करना शुभ होता है।  

महाशिवरात्रि के दिन पूजा के लिए आवश्यक पूजा सामग्री 

भगवान शिव जी को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा में कई प्रकार की सामग्रियों का उपयोग किया जाता है। श्री कृष्ण किंकर जी महराज के अनुसार,  ये सामग्रियाँ न केवल धार्मिक महत्व रखती हैं, बल्कि इनका अपना-अपना विशेष अर्थ भी है। इन सामग्रियों के बिना भोलेनाथ की पूजा अधूरी रह सकती है। इसलिए महाशिवरात्रि से पहले ही इन पूजा सामग्रियों को इकट्ठा कर लेना चाहिए।  

1. जल

शिवलिंग का जलाभिषेक करना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। यह शुद्धता और शांति का प्रतीक है।

2. दूध

दूध को शुद्धता और पोषण का प्रतीक माना जाता है। शिवलिंग पर दूध चढ़ाने से मानसिक शांति मिलती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।

3. दही

दही मिठास और समृद्धि का प्रतीक है। शिवलिंग पर दही चढ़ाने से जीवन में सुख और समृद्धि आती है।

4. शहद

शहद को मिठास और स्वास्थ्य का प्रतीक माना जाता है। शिवलिंग पर शहद चढ़ाने से वाणी में मधुरता आती है और स्वास्थ्य अच्छा रहता है।

5. घी

घी को शुद्धता और शक्ति का प्रतीक माना जाता है। शिवलिंग पर घी चढ़ाने से तेज और ऊर्जा मिलती है।

6. बेलपत्र

बेलपत्र भगवान शिव जी को अत्यंत प्रिय है। इसे शांति, पवित्रता और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

7. धतूरा

धतूरा भगवान शिव जी को अर्पित किया जाता है। यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने का प्रतीक है।

8. फूल

फूल सुंदरता और श्रद्धा का प्रतीक हैं। भगवान शिव को सफेद फूल जैसे कि चमेली, मोगरा और धतूरा विशेष रूप से प्रिय हैं।

9. फल

फल समृद्धि और प्रसन्नता का प्रतीक हैं। भगवान शिव जी को फल अर्पित करने से जीवन में सुख और समृद्धि आती है।

10. धूप और दीप

धूप और दीप सुगंध और प्रकाश का प्रतीक हैं। ये वातावरण को शुद्ध करते हैं और सकारात्मक ऊर्जा लाते हैं।

11. भस्म

भस्म वैराग्य का प्रतीक है। भगवान शिव जी को भस्म अर्पित करने से अहंकार दूर होता है।

12. चंदन

चंदन शीतलता और शांति का प्रतीक है। शिवलिंग पर चंदन लगाने से मानसिक शांति मिलती है।

13. अक्षत
अक्षत अखंडता और पूर्णता का प्रतीक है। भगवान शिव जी को अक्षत अर्पित करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

14. भांग

भांग भगवान शिव जी को अर्पित की जाती है। यह एकाग्रता और ध्यान का प्रतीक है।

15. वस्त्र

वस्त्र सम्मान और श्रद्धा का प्रतीक हैं। भगवान शिव जी को वस्त्र अर्पित करने से आशीर्वाद मिलता है।

अन्य सामग्रियां भी कर सकते हैं अर्पित

इन सामग्रियों के अतिरिक्त, हम अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार अन्य वस्तुएं भी अर्पित कर सकते हैं। महत्वपूर्ण यह है कि, पूजा सच्चे मन और भक्ति भाव से की जाए। और यह सामग्री आपके पास उपलब्ध नहीं है तो भी चिंता की कोई बात नहीं। आप अगर सच्चे हृदय से, पवित्र मन से महाशिवरात्रि की रात्री को भगवान शिव जी और माता पार्वती जी का ध्यान करते है, पूरे भक्ति और श्रद्धा से ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप करते है, तो भी आपके ऊपर भगवान भोलेनाथ जी की अवश्य कृपा होती है। अपने भक्तों को भगवान शिव जी कभी निराश नहीं करते। 

महादेव और श्री कृष्ण से जुड़ी रोचक कथा

श्रीकृष्ण चरित मानस (रसायन महाकाव्य) में भगवान भोलेबाबा की एक सुन्दर कथा का रस हमें मिलता है। चरित मानस में भगवान श्री कृष्ण जब महारास में बाँसुरी बजा रहे थे तब उस बाँसुरी मधुर स्वर सुनकर भगवान श्री भोलेबाबा शंकर जी कैलाश पर्वत से वृंदावन आए। माता पार्वती जी पहले ही आ गई थी। भोलेबाबा जब महारास में प्रवेश करने लगे, तो गोपीजनों ने उन्हे रोक दिया और कहा कि महारास में केवल गोपियाँ ही प्रवेश कर सकती है, तो आप कुसुम सरोवर जाकर स्नान करें। जैसे ही भगवान शिव शंकर जी ने कुसुम सरोवर में स्नान किया, वह खुद गोपी बन गए। और महारास में सम्मिलित हुए।  “जहाँ शंकर गोपी बने आयो,अति दुर्लभ रस पी बोरायों” – (श्री कृष्ण चरित मानस रसायन महाकाव्य)  तब से वह श्री वृंदावन धाम में गोपेश्वर महादेव के नाम से विराजमान है। हर महाशिवरात्रि को वहां उनकी पूजा अर्चना होती है। जिससे मनुष्य परमात्मा से जुड़ता है। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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