
लाजवर्त एक ऐसा चमत्कारी रत्न है जो शनि के साथ ही राहु-केतु के बुरे प्रभाव को भी दूर कर सकता है। मुख्य रूप से इस रत्न को शनि से जोड़कर देखा जाता है। इस रत्न को पहनने से करियर और आर्थिक पक्ष से जुड़ी सभी परेशानियां दूर हो सकती हैं। इसके साथ ही पारवारिक जीवन में भी लाजवर्त धारण करने से शुभ फल मिलते हैं। हालांकि हर कोई इस रत्न को नहीं धारण कर सकता, कुछ राशियों के लिए और कुंडली में शनि की कुछ विशेष स्थितियों में ही इस रत्न को पहना जा सकता है। आइए जान लेते हैं कि इस रत्न को कैसे धारण करना है और कौन इसे पहन सकता है।
लाजवर्त रत्न
लाजवर्त का रंग नीला होता है लेकिन इसके ऊपर गोल्डन रंग की धारियां भी आप देख सकते हैं। मुख्य रूप से यह रत्न अफगानिस्तान और रूस में पाया जाता है। इसे धारण करने पर आपके जीवन में भी और आपके स्वास्थ्य में भी अच्छे बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
कौन पहन सकता है?
लाजवर्त एक शक्तिशाली रत्न है, जिसे ज्योतिष और आध्यात्मिक दृष्टि से शुभ और लाभकारी माना जाता है। शनि की राशियां मकर और कुंभ के जातकों के लिए यह रत्न सबसे शुभ माना गया है। इसके साथ ही शनि के मित्र शुक्र की राशि तुला वाले भी इसे धारण कर सकते हैं। वहीं जिन लोगों की कुंडली में शनि उच्च का है उन्हें भी इस रत्न को धारण करने से लाभ होता है। राहु-केतु की शुभता अगर कुंडली में हो, तब भी यह रत्न धारण किया जा सकता है। हालांकि इस रत्न को धारण करने से पहले योग्य ज्योतिषाचार्य से सलाह मशवरा आपको अवश्य करना चाहिए।
कैसे पहनें लाजवर्त?
लाजवर्त रत्न को आप शनिवार के दिन धारण कर सकते हैं। इसे मध्यमा अंगुली (Middle Finger) में पहनना शुभ माना जाता है। आप 8 या 10 रत्ती का लाजवर्त रत्न अंगुली में धारण कर सकते हैं। इसे चांदी की अंगूठी में लगाकर पहना जा सकता है।
लाजवर्त धारण करने के लाभ
शनि के इस रत्न को धारण करने से मानसिक शांति और आत्म-जागरूकता प्राप्त होती है। मन शांत रहता है। आपके साहस पराक्रम में भी यह रत्न वृद्धि करता है। बुरे सपने, बुरी नजर और नकारात्मक विचारों से भी यह रत्न छुटकारा दिलाता है। करियर के क्षेत्र में इस रत्न को पहनने से सफलता व्यक्ति को प्राप्त होती है। साथ ही गले, फेफड़ों से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं भी दूर होती हैं। लेखक, संगीतकार आदि के लिए भी यह रत्न बेहद शुभ माना गया है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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