
Vijaya Ekadashi 2025: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है। पूरे साल में कुल 24 एकादशी आती है लेकिन अधिकमास पड़ने पर इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। प्रत्येक महीने में दो बार एकादशी व्रत रखा जाता है एक कृष्ण और एक शुक्ल पक्ष में। दोनों ही एकादशी के नाम भी अलग-अलग रखे गए हैं और इनसे मिलने वाले फल भी अलग-अलग होते हैं। फाल्गुन कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी के नाम से जाना जाता है । ये एकादशी विजय दिलाने वाली मानी जाती है। विजया एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को हर क्षेत्र में विजय मिलती है, उसे कभी भी हार का सामना नहीं करना पड़ता है। तो आइए जानते हैं कि विजया एकादशी की पूजा किस विधि और मुहूर्त में करना उत्तम रहेगा।
विजया एकादशी 2025 शुभ मुहूर्त
फाल्गुन कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का प्रारंभ 23 फरवरी को दोपहर 1 बजकर 55 मिनट पर होगा। एकादशी तिथि समाप्त 24 फरवरी को दोपहर 1 बजकर 44 मिनट पर होगा। विजया एकादशी का पारण 25 फरवरी को सुबह 7 बजकर 1 मिनट से सुबह 9 बजकर 21 मिनट तक किया जाएगा। पारण तिथि के दिन द्वादशी तिथि समाप्त होने का समय दोपहर 12 बजकर 47 मिनट रहेगा।
विजया एकादशी पूजा विधि
- विजया एकादशी के दिन प्रात:काल स्नान आदि कर साफ कपड़े पहन लें।
- एकादशी के दिन पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ माना जाता है।
- इसके बाद मंदिर या पूजा घर को साफ कर गंगाजल छिड़कर शुद्ध कर लें।
- अब एक चौकी रखकर उसपर पीले रंग का कपड़ा बिछा दें।
- आसन पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित कर दें।
- फिर एक घी का दीया जलाएं और व्रत का संकल्प लें।
- लक्ष्मी-नारायण को पीले रंग के फूल, धूप और अन्य पूजा सामग्री अर्पित करें।
- फल, मिठाई, तुलसी आदि प्रसाद का भोग विष्णु जी को लगाएं।
- इसके बाद इंदिरा एकादशी की कथा पढ़ें और भगवान विष्णु की आरती मंत्र के साथ पूजा का समापन करें।
भगवान विष्णु के मंत्र
- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
- ॐ नमोः नारायणाय नमः
- ॐ विष्णवे नमः
- ॐ अं वासुदेवाय नमः
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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