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Mahashivratri 2025: शिवलिंग की पूजा सबसे पहले किसने की थी? महाशिवरात्रि से है इसका सीधा संबंध

Mahashivratri 2025: महाशिवरात्रि पीछे मनाने के पीछे क्या कारण हैं और इस दिन का शिवलिंग की पूजा से क्या संबंध है, आइए जानते हैं।

Written By: Naveen Khantwal
Published : Feb 19, 2025 18:30 IST, Updated : Feb 19, 2025 18:30 IST
Mahashivratri 2025
Image Source : META AI महाशिवरात्रि 2025

Mahashivratri 2025: महाशिवरात्रि का त्योहार साल 2025 में 26 फरवरी को मनाया जाएगा। इस दिन को भगवान शिव की पूजा के लिए बेहद शुभ माना जाता है। शिव पूजन के लिए इस दिन को अत्यंत शुभ मानने के पीछे कई कारण भी हैं। इनमें से एक कारण तो यह है कि इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। इसके अलावा दो ऐसी घटनाएं भी इस दिन घटी थीं जिनके चलते महाशिवरात्रि के दिन को भोलेनाथ की कृपा के लिए अहम माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन शिवलिंग की उत्पत्ति भी हुई थी। आइए ऐसे में जान लेते हैं कि शिवलिंग का पूजन सबसे पहले किसने किया था और महाशिवरात्रि से इसका क्या संबंध है। 

शिवलिंग पूजा का महाशिवरात्रि से संबंध 

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन ही शिवलिंग की उत्पत्ति हुई थी। इस दिन भगवान शिव के शिवलिंग स्वरूप की भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी ने सबसे पहले पूजा अर्चना की थी। इसलिए महाशिवरात्रि के पर्व के दौरान आज भी शिवलिंग की विधि-विधान से पूजा होती है, और शिवलिंग का रुद्राभिषेक किया जाता है। 

महाशिवरात्रि मनाने का यह भी है कारण 

धार्मिक शास्त्रों के अनुसार जब देवताओं और असुरों के द्वारा समुद्र मंथन किया जा रहा था तो सबसे पहले समुद्र से विष की उत्पत्ति हुई। इस विष के चलते सारी सृष्टि में हाहाकार मच गया। इसके बाद सृष्टि की रक्षा करने के लिए भगवान शिव आगे आए और उन्होंने विष पान किया। माना जाता है कि फाल्गुन माह की चतुर्दशी तिथि के दिन ही शिव जी ने विष का पान किया था और उसी दिन इन्हें नीलकंठ नाम मिला था, क्योंकि विष पीने के कारण उनका कंठ नीला पड़ गया था। इसके बाद विष असर को कम करने के लिए देवी-देवताओं और असुरों ने शिव जी पर जल, भांग, धतूरा, बेलपत्र आदि चीजें अर्पित की थीं। इसलिए भी महाशिवरात्रि के दिन शिव पूजन करना शुभ माना जाता है, क्योंकि इसी दिन भगवान शिव ने जगत की रक्षा की थी। 

शिव पार्वती का विवाह

महाशिवरात्रि मनाने के पीछे का एक कारण शिव-पार्वती का विवाह भी है। इसके बारे में ज्याादातर सभी लोग अवगत हैं। माना जाता है कि इसी दिन शिव जी ने माता पार्वती को अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया था और शिव-शक्ति एक हुए थे।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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