राजस्थान के सीकर जिले में एडीजे कोर्ट ने आरोपी पति को पत्नी की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह फैसला इसलिए भी खास रहा क्योंकि आरोपी को दोषी ठहराने में उसके 8 साल के जुड़वां बेटों की गवाही निर्णायक साबित हुई। दोनों बच्चों ने कोर्ट में अपने पिता की करतूत का आंखों देखा हाल सुनाया, जिसे सुनकर अदालत भी सख्त हुई और आरोपी को किसी भी तरह की राहत देने से इनकार कर दिया।
सरकारी वकील गोपाल सिंह बिजारणियां ने जानकारी देते हुए बताया कि यह घटना 7 अगस्त 2022 की है। आरोपी कर्मवीर (28), जो कि एक प्राइवेट स्कूल में शिक्षक था, ने अपनी पत्नी संजू देवी (28) की गला दबाकर हत्या कर दी थी और बाद में घटना को आत्महत्या का रूप देने के लिए शव को फांसी पर लटका दिया था।
शादी के चार महीने बाद शुरू हुई थी मारपीट
मृतका के भाई मुकेश कुमार ने 21 अगस्त 2022 को धोद थाने में मामला दर्ज कराया था। रिपोर्ट में बताया गया कि संजू देवी की शादी 2008 में सीकर के भुवाला निवासी कर्मवीर से हुई थी। शादी के महज 3-4 महीने बाद से ही पति ने मारपीट शुरू कर दी थी। वह पीहर से पैसे लाने के लिए दबाव बनाता था। एक साल तक संजू पीहर में रही और समझाइश के बाद दोबारा ससुराल आई। 7 अगस्त की शाम करीब 7 बजे कर्मवीर शराब के नशे में घर आया और संजू देवी से झगड़ा करने लगा। झगड़े के दौरान उसने पहले दोनों बच्चों को एक कमरे में बंद कर दिया और फिर संजू के साथ मारपीट की। प्लास्टिक के पाइप से उसका गला दबाकर हत्या कर दी और बाद में उसे पंखे से लटका दिया।
बच्चों ने कोर्ट में सुनाई आंखों देखी घटना
सरकारी वकील के मुताबिक, इस मामले में सबसे अहम गवाही संजू देवी के जुड़वां बच्चों की रही। दोनों बच्चों ने कोर्ट में बताया कि पापा शराब पीकर आए थे और मम्मी को पीटने लगे। हमें एक कमरे में बंद कर दिया गया था। हमने खिड़की से देखा कि पापा मम्मी को रस्सी और लातों से मार रहे थे। मम्मी चिल्ला रही थी और जमीन पर गिर गई थी। कोर्ट ने बच्चों को चश्मदीद गवाह माना और उनके बयान को महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया।
आरोपी ने पुलिस को गुमराह करने की भी कोशिश की
हत्या के बाद कर्मवीर ने पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की। उसने पुलिस को बताया कि पत्नी ने मोबाइल छुपा लिया था और इसी बात पर विवाद हुआ। उसने अपने साले को भी कॉल कर फोन दिलवाने को कहा। लेकिन उसकी पत्नी संजू ने फोन देने से मना कर दिया। फिर वह घर से बाहर चला गया और जब लौटा तो संजू का शव फंदे पर लटका मिला। सरकारी पक्ष ने कोर्ट में 19 गवाह और 26 साक्ष्य प्रस्तुत किए। सबूतों और गवाहों की गहराई से जांच के बाद कोर्ट ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) के तहत उम्रकैद और 1 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। इसके अलावा धारा 498-A (दहेज प्रताड़ना) में 3 साल के साधारण कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा भी सुनाई गई।
“पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते को शर्मसार किया” - कोर्ट
फैसला सुनाते हुए एडीजे कोर्ट क्रम संख्या-1 के न्यायाधीश महेंद्र प्रताप बेनीवाल ने कहा कि शादी के बाद पति अपनी पत्नी का संरक्षक होता है, लेकिन इस मामले में आरोपी ने उस पवित्र रिश्ते को शर्मसार किया है। उसके इस कृत्य से दोनों मासूम बच्चे अनाथ हो गए। इसलिए आरोपी किसी भी तरह से सजा में नरमी का पात्र नहीं है।
(सीकर से अमित शर्मा की रिपोर्ट)