किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने गुरुवार को ऐलान किया कि 101 किसानों का एक समूह 21 जनवरी को शंभू सीमा बिंदु से दिल्ली की ओर अपना मार्च फिर से शुरू करेगा। उनका लक्ष्य केंद्र सरकार पर दबाव डालना है ताकि सरकार किसानों की मांगों खास तौर से फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी, को मंजूर करे।
इससे पहले 101 किसानों का जत्था पिछले साल दिसंबर में तीन अलग-अलग प्रयासों में शंभू सीमा से दिल्ली की ओर पैदल मार्च करने निकला था, लेकिन हरियाणा में सुरक्षा बलों ने उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी थी। इन कोशिशों के बावजूद किसान अपनी मांगों को लेकर पीछे नहीं हटे हैं।
गौरतलब है कि 111 किसानों का एक समूह 15 जनवरी को किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल के साथ खनौरी सीमा के पास आमरण अनशन पर बैठ गया था। यह अनशन डल्लेवाल के लिए 52वां दिन है। किसान नेताओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे अपने संघर्ष को जारी रखेंगे।
खनौरी सीमा पर आमरण अनशन
किसान मजदूर मोर्चा के नेता सरवन सिंह पंधेर ने इस मौके पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए केंद्र सरकार की आलोचना की। पंधेर ने कहा, ‘‘हमने देखा है और हमें भी लगता है कि सरकार किसी भी बातचीत के लिए तैयार नहीं है। आंदोलन को तेज करने का फैसला दोनों मंचों (एसकेएम-गैर राजनीतिक, केएमएम) ने लिया है।’’ इस बीच, 111 किसानों का समूह और डल्लेवाल के समर्थक खनौरी सीमा पर आमरण अनशन कर रहे हैं। उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं भी बढ़ रही हैं, क्योंकि लंबी अवधि तक भूख हड़ताल करने के कारण डल्लेवाल का स्वास्थ्य बिगड़ सकता है।
सीमा पर सुरक्षा उपायों को कड़ा किया गया
सरकार की ओर से दी गई सुरक्षा बढ़ोतरी के बावजूद किसानों का यह आंदोलन तेज होता जा रहा है। हरियाणा पुलिस ने सीमा पर सुरक्षा उपायों को कड़ा कर दिया है और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 लागू कर दी है, जिसके तहत पांच या उससे अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर प्रतिबंध है। किसान आंदोलन 13 फरवरी 2024 से शंभू और खनौरी सीमा पर चल रहा है, जब सुरक्षा बलों ने किसानों को दिल्ली तक मार्च करने की अनुमति नहीं दी थी।
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