उत्तर प्रदेश में रियल एस्टेट सेक्टर एक बार फिर रफ्तार पकड़ता दिख रहा है। निवेशकों का भरोसा बढ़ रहा है और रियल्टी मार्केट में नई जान लौट आई है। इसी कड़ी में यूपी RERA ने राज्यभर में 864 करोड़ रुपये के छह नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है।
UP RERA ने अपनी इस कार्रवाई से यह स्पष्ट संकेत दिया है कि रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता और खरीदारों के अधिकारों की सुरक्षा सर्वोपरि है। नियमों की अनदेखी करने वाले डेवलपर्स के खिलाफ अब सख्त और त्वरित कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला दिल्ली में सरकारी हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता को लेकर बड़ी चेतावनी बनकर सामने आया है। हालांकि, दिल्ली विकास प्राधिकरण ने अपनी प्रतिक्रिया में फ्लैट मालिकों द्वारा की गई अल्टरेशन को दोषी ठहराया।
ग्राहक ने मुंबई के मुलुंड में स्थिति लोढ़ा डेवलपर्स की एक सोसाइटी में 7 लाख रुपये देकर 2.27 करोड़ रुपये का घर बुक किया था।
जायद नोमान ने कहा, “हम ये बात पूरे विश्वास के साथ कह रहे हैं क्योंकि इनमें से ज्यादातर प्रोजेक्ट्स रियल एस्टेट नियामकीय प्राधिकरण (रेरा) के लिए ‘लॉग-इन’ हो चुकी हैं और अगले कुछ हफ्तों में पेश कर दी जाएंगी।”
रेरा ने कहा कि ऐसी संभावना है कि कुछ घर खरीदार परियोजना के सभी विवरण देखे बिना ही निवेश कर सकते हैं और किसी न किसी तरह से धोखा खा सकते हैं। इन परियोजनाओं को प्रमोटरों ने रेरा के शुरुआती दिनों में रजिस्टर्ड कराया था।
प्रोजेक्ट का अप्रूव्ड मैप और रेरा में रजिस्टर मैप और उसके टावर्स के नाम अलग होने से होम बायर्स को भी सही स्थिति समझने में भ्रम होता है। प्रोमोटर द्वारा रेरा के इन नवीन आदेशों का अनुपालन करने पर वर्तमान में आ रही समस्याओं का समाधान हो जाएगा।
यशवी होम्स के प्रमोटर ने परियोजना की रेरा रजिस्ट्रेशन नंबर और वेबसाइट की डिटेल भी विज्ञापन में नहीं दिया था जबकि निर्धारित नियमों के तहत ऐसा करना जरूरी है।
क्रेडाई वेस्टर्न यूपी के सचिव दिनेश गुप्ता ने कहा कि क्रेडाई के सदस्यों, रेरा अधिकारियों के साथ-साथ घर खरीदारों के प्रतिनिधियों की मदद से हम यूपी रेरा कॉन्सिलिएशन फोरम में दायर किए गए लगभग 90% से 95% मामलों को हल करने में सफल रहे हैं।
अगर कोई आवंटी शिकायत दर्ज कराने के लिए किसी विशेषज्ञ की सहायता लेता है तो उसका मोबाइल एवं ईमेल भी देना होगा। शिकायतकर्ता के पास प्रीव्यू एवं एडिटिंग का विकल्प मिलेगा। इसका उपयोग फीस जमा करके शिकायत जमा करने से पूर्व ही कर सकेंगे।
रियल एस्टेट में सुधार के लिए रेरा लगातार कदम उठा रहा है। अब यह फैसला मील का पत्थर साबित होगा। अभी तक कई बिल्डर भोले-भाले खरीदारों से ज्यादा पैसा ले लेते हैं।
रेरा के तहत परियोजनाओं (500 वर्ग मीटर से अधिक और आठ अपार्टमेंट से ऊपर) को शुरू करने से पहले उनका रेरा के तहत पंजीकरण करना अनिवार्य है।
आप भी बिल्डर की गलती के कारण लोन की ईएमआई के साथ-साथ किराया भर रहे हैं तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है।
मई, 2017 में पूरी तरह अमल में आए इस कानून के अंतर्गत लगभग सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में रियल एस्टेट प्राधिकरण स्थापित किया गया है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, उप्र रेरा के पास 47,671 शिकायतें आ चुकी हैं, जो देशभर में आईं शिकायतों का लगभग 38 प्रतिशत हैं।
UP RERA ने सम्बंधित कंपनियों को अपने आदेशों की अनुपालन रिपोर्ट 15 दिनों के अंदर प्रस्तुत करने तथा जुर्माने की धनराशि एक माह के अंदर जमा करने का निर्देश दिया है।
RERA ने कुल 17 बिल्डरों से जुड़े 63 मामलों में 9.70 प्रतिशत ब्याज के साथ पैसा लौटाने को कहा है।
रेरा ने आदेश दिया है कि तीन किश्तों का भुगतान समय पर नहीं करने वाले खरीदारों का आवंटन निरस्त किया जाएगा।
घर के खरीदार आगामी एक मई से उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (रेरा) के समक्ष अपनी शिकायतों की आमने-सामने की सुनवाई कर सकते हैं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
उत्तर प्रदेश रीयल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (रेरा) ने शुक्रवार को कहा कि उसने आदेशों का अनुपालन नहीं करने को लेकर 11 कंपनियों पर 1.24 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है।
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