भारतीय रिजर्व बैंक ने इस ड्राफ्ट में कहा कि डिविडेंड देने से पहले बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को लॉन्ग टर्म ग्रोथ प्लान और पूंजी की स्थिति को ध्यान में रखना होगा।
सोशल मीडिया के दौर में एक मैसेज कब अफवाह से “खबर” बन जाए, पता ही नहीं चलता। ऐसा ही एक दावा इन दिनों तेजी से फैल रहा है कि मार्च 2026 से RBI 500 रुपये के नोटों का चलन बंद करने वाला है और एटीएम से भी इन नोटों की निकासी रोक दी जाएगी। जानें क्या है इस खबर की सच्चाई।
आरबीआई गवर्नर ने कहा कि नवाचार और वृद्धि को बढ़ावा देना, उपभोक्ताओं की रक्षा करना, विनियमन और पर्यवेक्षण के लिए एक व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना जो वित्तीय प्रणाली की दक्षता में सुधार करता है, समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।
गवर्नर ये स्पष्ट किया कि आगे चलकर वृद्धि की रफ्तार कुछ नरम पड़ेगी और महंगाई बढ़कर आरबीआई के 4 प्रतिशत के लक्ष्य के करीब पहुंचेगी।
जनवरी 2026 से देश में चेक क्लियरेंस का सिस्टम पूरी तरह बदलने वाला था। बैंकों को सिर्फ तीन घंटे के भीतर चेक को अप्रूव या रिजेक्ट करना होता और ग्राहकों को पहले से कहीं जल्दी पैसा मिल जाता। लेकिन लागू होने से ठीक पहले RBI ने इस बड़े बदलाव पर अचानक ब्रेक लगा दिया।
भारतीय रिजर्व बैंक ने इस साल रेपो रेट में 5 बार में 1.25 प्रतिशत की कटौती की। रिजर्व बैंक ने इस साल रेपो रेट में सबसे पहले फरवरी में 0.25 प्रतिशत, अप्रैल में 0.25 प्रतिशत, जून में 0.50 प्रतिशत और फिर दिसंबर में 0.25 प्रतिशत की कटौती की।
बैंक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, लेकिन उनके जवाब और अतिरिक्त दस्तावेजों की समीक्षा के बाद RBI ने पाया कि उल्लंघन के आरोप सही हैं और इसके लिए आर्थिक दंड लगाना आवश्यक है।
केंद्रीय बैंक ने प्रभावित बैंक के जमाकर्ताओं को बड़ा आश्वासन दिया है। बैंक ने स्पष्ट किया कि योग्य जमाकर्ताओं को डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन (DICGC) के नियमों के तहत प्रति जमाकर्ता प्रति बैंक अधिकतम ₹5 लाख तक की जमा राशि पूरी तरह सुरक्षित है और इसका बीमा लाभ मिलेगा।
भारतीय रिजर्व बैंक के सभी प्रतिबंध मंगलवार को बैंक बंद होने के साथ ही लागू हो चुके हैं और अगले 6 महीने तक लागू रहेंगे।
कर्मचारी संघ ने आरबीआई के मुद्रा प्रबंधन विभाग के प्रभारी डिप्टी गवर्नर टी. रबी शंकर को लिखे पत्र में कहा कि एटीएम से निकलने वाले ज्यादातर नोट ज्यादा रकम के ही होते हैं।
आरबीआई अधिनियम, 1934 की धारा 45-IA (6) के तहत आरबीआई को मिली शक्तियों के अनुसार यह एक्शन लिया गया है। आरबीआई द्वारा जारी निर्देशों की अवहेलना के कारण भी इन पर कार्रवाई हुई है।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने हाल ही में इन सिक्कों को भुगतान के रूप में स्वीकार करने की अपील की है और बताया है कि ये सभी सिक्के मान्य हैं। इसको लेकर कोई दुविधा नहीं होनी चाहिए।
RBI ने नीतिगत दर में कटौती का फैसला ऐसे समय में लिया है जब भारत को अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाए गए 50% की ऊंची टैरिफ दर जैसे वैश्विक आर्थिक दबावों का सामना करना पड़ रहा है।
RBI ने आम लोगों को बड़ी राहत देते हुए रेपो रेट में 0.25% की कटौती कर दी है। इस फैसले का सीधा असर आपकी जेब पर पड़ेगा, क्योंकि अब होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI पहले से कम हो जाएगी। आइए जानते हैं कि आपकी EMI कितनी कम होगी?
बैंक लोन की EMI पर राहत की बारिश करते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने आज बड़ा फैसला सुना दिया। मौद्रिक समीक्षा की घोषणा करते हुए गवर्नर ने रेपो रेट में 0.25% की कटौती का ऐलान किया, जिससे रेपो रेट घटकर 5.25% पर आ गई है।
जब बॉन्ड्स जारी किए गए थे, तब ऑनलाइन भुगतान पर ₹50 का डिस्काउंट भी दिया गया था। इस डिस्काउंट को ध्यान में रखते हुए, लाभ बढ़कर 340.39% हो जाता है।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की आगामी मौद्रिक नीति समिति (MPC) बैठक से पहले अर्थशास्त्रियों और निवेशकों के बीच उत्सुकता बढ़ गई है। बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि RBI अपने मैक्रोइकॉनॉमिक अनुमान में बड़े बदलाव कर सकता है।
अक्टूबर में खुदरा महंगाई (सीपीआई) घटकर 0.3% पर आ गई, जो पिछले एक दशक का सबसे निचला स्तर है। इससे आरबीआई को फैसला लेने में मदद मिलेगी। अगले 12 महीनों में औसत सीपीआई महंगाई लगभग 3.7% रहने की संभावना है।
मौद्रिक नीति समिति की अगली बैठक 3-5 दिसंबर 2025 तक होनी है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा 5 दिसंबर को समिति के फैसलों की घोषणा करेंगे।
RBI के अनुसार एचडीएफसी बैंक में कुछ अनियमितताएं पाई गईं, जिनमें बैंक ने एक ही कैटेगरी के लोन पर कई बेंचमार्क अपनाए, जो दिशा-निर्देशों के विरुद्ध है। RBI ने कहा कि यह जुर्माना केवल नियामकीय कमियों पर आधारित है।
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