Thursday, March 20, 2025
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बैंक के डूबने या लाइसेंस रद्द होने पर अकाउंट में जमा पैसे के लिए क्लेम कहां करें? क्या पूरे पैसे निकाल पाएंगे आप?

बैंक के विफल होने की स्थिति में जमाकर्ताओं की सुरक्षा के लिए डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन यानी DICGC नाम की एक यूनिट है जो बैंक जमाराशियों का बीमा करती है।

Edited By: Sourabha Suman @sourabhasuman
Published : Feb 14, 2025 17:56 IST, Updated : Feb 14, 2025 18:01 IST
मुंबई में शुक्रवार को न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक की शाखा के बाहर मौजूद बैंक कस्टमर्स।
Photo:PTI मुंबई में शुक्रवार को न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक की शाखा के बाहर मौजूद बैंक कस्टमर्स।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) समय-समय पर को-ऑपरेटिव बैंकों की समीक्षा करता रहता है। कई बार अनियमितत या नियम का पालन न होने के चलते आरबीआई इनका लाइसेंस ही कैंसिल कर देता है या कुछ समय के लिए इनपर प्रतिबंध लगा देता है। सवाल यह है कि ऐसे में अगर आपका भी इन बैंक में अकाउंट और उसमें पैसे जमा हैं तो उनका क्या होगा? क्योंकि आरबीआई ने तो बैंक पर किसी भी तरह का लेन-देन, जमा, लोन आदि करने पर प्रतिबंध लगा दिया है।

5 लाख रुपये तक की राशि कर सकते हैं क्लेम

दरअसल, किसी बैंक में अकाउंट होल्डर के जमा पैसे का बीमा होता है। हालांकि, यह बीमा मैक्सिमम 5 लाख रुपये तक की रकम कवर करता है। यानी आपके बैंक अकाउंट में चाहे जितने पैसे  जमा हों, लेकिन आप महज 5 लाख रुपये तक के इंश्योरेंस का क्लेम कर सकते हैं। बता दें, बैंक के विफल होने की स्थिति में जमाकर्ताओं की सुरक्षा के लिए डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन यानी DICGC नाम की एक यूनिट है जो बैंक जमाराशियों का बीमा करती है। DICGC भारतीय रिज़र्व बैंक की एक सहायक कंपनी है। डीआईसीजीसी जमाराशियों जैसे बचत, सावधि, चालू, आवर्ती आदि का बीमा करता है।

भारतीय रिज़र्व बैंक के मुताबिक, डीआईसीजीसी अधिकतम पांच लाख रुपये तक मूलधन और ब्याज का बीमा करता है। उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति के खाते में मूलधन 4,95,000 और अर्जित ब्याज 4,000 है, तो डीआईसीजीसी द्वारा बीमा की गई कुल राशि 4,99,000 होगी।

बैन हो चुके बैंक के ग्राहक जान लें

अगर कोई बैंक परिसमापन में चला जाता है, तो डीआईसीजीसी परिसमापक से क्लेम लिस्ट प्राप्त होने की तिथि से दो महीने के भीतर परिसमापक को हर जमाकर्ता की दावा राशि पांच लाख रुपये तक का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है। परिसमापक को प्रत्येक बीमित जमाकर्ता को उनकी दावा राशि के मुताबिक दावा राशि डिस्ट्रीब्यूट करनी होती है। बैंक पर बैन लगने की स्थिति में, परिसमापक जमाकर्ताओं के मुताबिक क्लेम लिस्ट तैयार करता है और उसे जांच और भुगतान के लिए DICGC को भेजता है। DICGC परिसमापक को पैसे का भुगतान करता है जो जमाकर्ताओं को भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होता है।

न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक का मामला

आरबीआई ने न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को 12 महीने के लिए भंग कर दिया है। आरबीआई ने एसबीआई के पूर्व चीफ जनरल मैनेजर श्रीकांत को इस अवधि के दौरान बैंक का प्रशासक (एडमिनिस्टेटर) नियुक्त किया है। भारतीय रिजर्व बैंक ने प्रबंधन को सहायता करने के लिए एक एडवाइजर्स की कमेटी भी गठित की है। यानी न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक के कस्टमर को अब मैक्सिमम 5 लाख रुपये तक के इंश्योरेंस का क्लेम DICGC के पास करना होगा।

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