भारत और उसके पड़ौसी देश पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को लेकर जो खबरें आईं, वो किसी चमत्कार से कम नहीं थी। बीते एक साल से भयंकर कंगाली झेल रहे पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार किसी बच्चे की गुल्लक जितना ही बचा है, लेकिन 10 फरवरी को समाप्त सप्ताह के दौरान पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार आश्चर्यजनक रूप से बढ़ गया। वहीं दूसरी ओर भार के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) में 10 महीने की सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली है। बस अंतर इतना है कि पाकिस्तान के पास कुल जितना फॉरेक्स रिजर्व है, उससे तीन गुना भारत ने एक हफ्ते में गंवा दिया।
पाकिस्तान में हो गया अजूबा
कंगाली की मार झेल रहे पाकिस्तान को कई महीनों के बाद विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोत्तरी देखने को मिली है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के मुताबिक आर्थिक रूप से बदहाल इस देश का फॉरेक्स रिजर्व 10 फरवरी को खत्म हफ्ते में 27.6 करोड़ डॉलर बढ़ गया। इसी के साथ यह अब 3.193 अरब डॉलर पहुंच गया है। उससे पिछले हफ्ते यह तीन अरब डॉलर से भी घट गया था। बता दें कि पाकिस्तान के पास जो फॉरेक्स रिजर्व है, वह एक महीने का आयात के लिए काफी नहीं है। पाकिस्तान में जरूरी चीजों का आयात बंद है वहीं खाने पीने के सामानों की किल्लत हो रही है।
भारत में आई 10 महीने की सबसे बड़ी गिरावट
पाकिस्तान में जहां विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ा है वहीं भारत में यह घट गया है। यह गिरावट कोई मामूली भी नहीं है। भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 8.319 अरब डॉलर की गिरावट आई है। यह बीते 10 माह की सर्वाधिक है। हालांकि पाकिस्तान के कुल विदेशी मुद्रा भंडार से यह गिरावट 10 गुना अधिक है। 10 फरवरी को समाप्त सप्ताह के दौरान भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 566.948 अरब डॉलर रह गया। यह एक अप्रैल, 2022 के बाद विदेशी मुद्रा भंडार में सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट है। हालांकि अब भी भारत का विदेशी मुद्रा भंडार पाकिस्तान से करीब 190 गुना ज्यादा है। अक्टूबर, 2021 में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 645 अरब डॉलर के उच्चस्तर पर पहुंचा था। लेकिन उसके बाद वैश्विक घटनाक्रमों के बीच केंद्रीय बैंक के रुपये के एक्सचेंज रेट में तेज गिरावट को रोकने के लिए मुद्रा भंडार का इस्तेमाल किया था।
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2022 में आई थी बड़ी गिरावट
2022 की फरवरी के बाद से विदेशी मुद्रा भंडार में बड़ी गिरावट आई है। फरवरी से लेकर सितंबर के बीच विदेशी मुद्रा भंडार में करीब 100 अरब डॉलर घट गया था। लेकिन उसके बाद इसमें तेजी देखी जा रही थी। सितंबर अंत से छह जनवरी तक इसमें 28.9 अरब डॉलर की तेजी आई थी। 27 जनवरी को यह 576.8 अरब डॉलर पहुंच गया था। अमेरिका में ब्याज दरों के बढ़ने से डॉलर मजबूत हुआ है। ऐसे में रुपये की गिरावट को थामने के लिए रिजर्व बैंक डॉलर खर्च करता है।