
Economic Survey 2024-25: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए देश का बजट पेश करने से एक दिन पहले आर्थिक सर्वे पेश किया। केंद्रीय मंत्री ने संसद में वित्त वर्ष 2024-25 का आर्थिक सर्वेक्षण पेश करते हुए कई अहम आंकड़े साझा किए। सर्वे के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट 6.3 से 6.8 फीसदी के बीच रह सकती है। सर्वे के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में महंगाई काबू में रहेगी लेकिन खपत स्थिर रह सकती है। इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक, देश में पेंशन योजनाओं में निवेश करने वाले लोगों की संख्या में शानदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
नेशनल पेंशन सिस्टम और अटल पेंशन योजना से मिली रफ्तार
राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) और अटल पेंशन योजना (APY) जैसी प्रमुख सरकारी पेंशन योजनाओं के आने से चालू वित्त वर्ष में देश के पेंशन सेक्टर में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। शुक्रवार को पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 के अनुसार, भारतीय पेंशन सेक्टर में कुल अंशधारकों की संख्या में सितंबर, 2024 तक सालाना आधार पर 16 प्रतिशत की बंपर बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस ताजा बढ़ोतरी के साथ पूरे देश में पेंशन योजनाओं में निवेश करने वाले लोगों की कुल संख्या बढ़कर अब 7.83 करोड़ हो गई। बताते चलें कि सितंबर, 2023 में कुल पेंशन अंशधारकों की संख्या 6.75 करोड़ थी।
6.29 करोड़ हुई अटल पेंशन योजना के लाभार्थियों की संख्या
इकोनॉमिक सर्वे में बताया गया है कि सितंबर, 2024 तक दर्ज कुल पेंशन अंशधारकों में अटल पेंशन योजना के लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 6.29 करोड़ हो गई, जो मार्च, 2023 में 5.38 करोड़ थी। इसमें अटल पेंशन योजना के पुराने वर्जन ‘एनपीएस लाइट’ के आंकड़े भी शामिल हैं। कुल पेंशनधारकों में एपीवाई के लाभार्थियों की हिस्सेदारी 80.3 प्रतिशत रही है। आर्थिक समीक्षा में बताया गया है कि एपीवाई में महिला अंशधारकों की हिस्सेदारी बढ़कर वित्त वर्ष 2023-24 में 52 प्रतिशत हो गई, जो वित्त वर्ष 2015-16 में 37.9 प्रतिशत थी। सर्वे के मुताबिक, एपीवाई में 18 से 25 आयु वर्ग की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़कर 45.5 प्रतिशत हो गई, जो वित्त वर्ष 2015-16 में सिर्फ 29.2 प्रतिशत थी।
पीटीआई इनपुट्स के साथ