दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के हालात समय के साथ लगातार तेजी से बिगड़ते रहे और किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। जी हां, कैग की रिपोर्ट में डीटीसी के हालातों का खुलासा हुआ है। वित्त वर्ष 2015-16 में डीटीसी की देनदारियां 28,263 करोड़ रुपये थी, जो वित्त वर्ष 2021-22 में दोगुना से भी काफी ज्यादा होकर 65,274 करोड़ रुपये हो गईं। इस तरह से दिल्ली परिवहन विभाग की देनदारियों में 6 सालों में 37,011 करोड़ रुपये का इजाफा हो गया। दिल्ली विधानसभा में सोमवार को पेश की गई नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में इन आंकड़ो की जानकारी दी गई।
लगातार नुकसान के बावजूद नहीं उठाया गया कोई जरूरी कदम
कैग की रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान डीटीसी को 14,000 करोड़ रुपये से भी ज्यादा का परिचालन घाटा हुआ। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बजट सत्र में 31 मार्च, 2022 को खत्म हुए वित्त वर्ष के लिए डीटीसी के कामकाज पर रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में कहा गया कि डीटीसी ने कोई बिजनेस प्लान तैयार नहीं किया था और न ही अपने घाटे को कम करने के लिए कोई लक्ष्य तय किया। रिपोर्ट के मुताबिक डीटीसी ने अपनी फाइनेंशियल कंडीशन पर भी कोई स्टडी नहीं की थी, जबकि उसे लगातार भारी नुकसान हो रहा था। लिहाजा, साल 2015 में डीटीसी के फ्लीट में जिन बसों की संख्या 4344 थी, वो साल 2023 में घटकर सिर्फ 3937 रह गईं।
80,000 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर सकता है दिल्ली का बजट
बताते चलें कि इस साल फरवरी में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को हराकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। दिल्ली में सरकार बनाने के बाद बीजेपी की रेखा गुप्ता सरकार मंगलवार को अपना पहला बजट पेश करेगी। दिल्ली की नई सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले इस बजट में यमुना की सफाई, इंफ्रास्ट्रक्चर और मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करने जैसे चुनावी वादों को लागू करने के लिए फंड का प्रावधान किया जाएगा। सरकारी सूत्रों ने बताया कि विधानसभा में पेश होने वाला 2025-26 का बजट 80,000 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर सकता है।



































