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कर्ज के रीस्ट्रक्चरिंग की मांग बहुत ज्यादा नहीं: एसबीआई चेयरमैन

रिजर्व बैंक ने पिछले महीने कंपनियों और खुदरा दोनों तरह के ऋणों को उन्हें एनपीए (फंसे कर्ज) की श्रेणी में डाले बिना एक बारगी रीस्ट्रक्चरिंग की मंजूरी दे दी। रीस्ट्रक्चरिंग का लाभ वे इकाइयां ले सकती हैं जो एक मार्च तक कर्ज लौटा रहे थे और जिनकी कर्ज चुकाने में 30 दिन से अधिक की देरी नहीं हुई है।

Edited by: India TV Paisa Desk
Published : Sep 22, 2020 10:47 pm IST, Updated : Sep 22, 2020 10:49 pm IST
'कर्ज के...- India TV Paisa
Photo:FILE PHOTO

'कर्ज के रीस्ट्रक्चरिंग की मांग बहुत ज्यादा नहीं'

नई दिल्ली। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा कि बाजार की उम्मीदों के विपरीत कर्ज रीस्ट्रक्चरिंग की बहुत ज्यादा मांग नहीं है। आरबीआई ने हाल ही में कर्जदारों को कोविड-19 संकट से पार पाने में मदद के लिये कर्ज के रीस्ट्रक्चरिंग की अनुमति दी है। उन्होंने कहा कि 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक कर्ज के पुनर्गठन की संभावना नहीं है। हालांकि, लोगों ने इसके करीब 8 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान जताया था। कुमार ने कहा, ‘‘बैंक के हिसाब से देखा जाए तो बहुत ज्यादा मांग नहीं है। जो एक चर्चा थी, स्थिति उसके उलट हो सकती है। इसके कई कारण हो सकते हैं। एक वजह यह है कि पहले ही इस संदर्भ में काम हो चुके हैं। साथ ही ऐसा लगता है कि कंपनियां इस बात को लेकर तैयार नहीं हैं कि उनका नाम रीस्ट्रक्चरिंग से जुड़े। ’’

उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में बड़ी कंपनियों में निचले क्रम की इकाइयां और एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम) में उच्च क्रम में आने वाली इकाइयों में रीस्ट्रक्चरिंग की जरूरत हो सकती है। उन्होंने कहा कि रीस्ट्रक्चरिंग के तहत 25 करोड़ रुपये से अधिक और 400 करोड़ रुपये से नीचे के कर्ज को लेकर रीस्ट्रक्चरिंग के लिये इकाइयां आएंगी। लेकिन अब तक बहुत ज्यादा ने इसको लेकर रूचि नहीं दिखायी है। रिजर्व बैंक ने पिछले महीने कंपनियों और खुदरा दोनों तरह के कर्ज को उन्हें एनपीए (फंसे कर्ज) की श्रेणी में डाले बिना एक बारगी रीस्ट्रक्चरिंग की मंजूरी दे दी। रीस्ट्रक्चरिंग का लाभ वे इकाइयां ले सकती हैं जो एक मार्च तक कर्ज लौटा रहे थे और जिनकी कर्ज चुकाने में 30 दिन से अधिक की देरी नहीं हुई है। कुमार ने कहा कि आर्थिक वृद्धि के पटरी पर आने में बुनियादी ढांचा महत्वपूर्ण होने जा रहा है। पांच साल में 110 लाख करोड़ रुपये के निवेश योजनाएं पाइपलाइन में हैं। उन्होंने कहा कि बैंक क्षेत्र के पास बचतकर्ताओं और कर्जदारों के बीच मध्यस्थता करने की जिम्मेदारी होगी। बैंकों के समक्ष चुनौतियों के बारे में एसबीआई प्रमुख ने कहा कि पूंजी, संचालन, फंसे कर्ज को लेकर जोखिम कुछ चुनौतियां हैं। इन जोखिमों को कम करने के लिये कदम उठाने की जरूरत है।

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