हेल्थ डेस्क: प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में आपको कई तरह की सावधानियों का ध्यान रखना चाहिए। गर्भधारण से लेकर डिलीवरी के बाद तक महिलाओं को तमाम तरह की परेशानियों से रूबरू होना पड़ता है। गर्भवस्था के दौरान महिलाओं का विशेष ख्याल रखना जरूरी है। ऐसे में उन्हें भरपूर आराम दिया जाना चाहिए।
गर्भावस्था में महिलाओं की एक समस्या है रात में नींद न आना। इस दौरान गर्भवती महिलाएं रात में अच्छे से सो नहीं पाती। इसके पीछे एक-दो नहीं बल्कि कई सारे कारण है, जिनकी वजह से गर्भवती महिलाओं को रात में सही तरीके से नींद नहीं आती है। उलझन, बेचैनी के कारण गर्भवती महिलाएं रात भर करवटें बदलती रहती हैं।
गर्भावस्था के दौरान महिलाओं की किडनी सामान्य से ज्यादा तेज गति से कार्य करती है। जिसके कारण किडनी फिलटरेशन का काम 50 प्रतिशत अधिक करती है और गर्भावस्था के समय बार-बार पेशाब लगती है। शरीर में ऐसाफेगल स्फिंक्टर होता है, जो ऐसोफेगस (हार्ट के पास का हिस्सा) और पेट के बीच में होता है। इसका प्रमुख कार्य खाने और पेट के एसिड्स को एसोफेगस में जाने से रोकना है।
गर्भावस्था में प्रोजेस्ट्रॉन हार्मोन रिलीज होने के कारण ऐसाफेगल स्फिंक्टर को आराम मिलता है और इस वजह से सीने में जलन महसूस होती है। दूसरी तरफ गर्भावस्था के दौरान अधिक खाने की वजह से भी अपच की समस्या भी हो जाती है। गर्भावस्था के दौरान शिशु गर्भ में हरकतें करता रहता है। इसके कारण महिला को बेचैनी होती है। इस कारण नींद न आने की समस्या होती है। शिशु के हिलने-डुलने पर नींद टूट जाती है।
गर्भावस्था के दौरान पैरों में ऐंठन और दर्द की समस्या बढ़ जाती है। गर्भावस्था के दौरान ये समस्या आम है। शरीर में सही तरह से ब्लड सर्कुलेशन न होने की वजह से यह समस्या होती है। इस वजह से भी नींद नहीं आती है। ज्यादातर महिलाएं बच्चे और उससे जुड़ी जिम्मेदारियों के बारे में लगातार सोचती रहती हैं। इस कारण उनमें तनाव की स्थिति बनी रहती है। रात में नींद खुलन का एक कारण तनाव भी हो सकता है।