
पैनिक अटैक होने पर लोग बेहद घबरा जाते हैं। इस स्थिति में सांस अच्छी तरह से नहीं आते है और दिमाग परेशान होता है। सोचिए पैनिक अटैक अधेड़ उम्र के लोग हैंडल नहीं कर पाते हैं तो अगर बच्चों को इसका सामना करना पड़े तो क्या होगा? आजकल बच्चे भी पैनिक अटैक का शिकार होने लगे हैं। यह आमतौर पर किशोरावस्था में शुरू होता है। अगर इसका इलाज न हो, तो भविष्य में गंभीर अवसाद और आत्मघाती व्यवहार जैसी समस्याएं हो सकती हैं। मनोचिकित्सक डॉ. जीतेंद्र नागपाल, बता रहे हैं कि जब बच्चे पैनिक अटैक से परेशान हो तो उनकी घबराहट को कम करने के लिए क्या करना चाहिए?
पैनिक अटैक कम करने के लिए इन टिप्स को करें फॉलो:
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गहरी सांस लें:
बच्चों में पैनिक अटैक आने पर, बच्चों को शांत करने में मदद करने के लिए, सांस लेने का तरीका बताएं। गहरी सांस लेने से राहत मिल सकती है। पैनिक अटैक के दौरान तेज़ सांस लेने और सीने में जकड़न जैसी समस्याएं आती हैं। गहरी सांस लेने से ये लक्षण कम होते हैं। नाक से धीरे-धीरे और गहरी सांस लें। सांस को कुछ सेकंड के लिए रोककर रखें फिर धीरे-धीरे मुंह से सांस छोड़ें।
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बच्चों की बातों को सुनें:
आपका बच्चा पैनिक अटैक की चपेट न आए इसलिए हमेशा उसकी बातों को सुने। उसकी लाइफ में क्या चला रहा है यह जानने की कोशिश करें। आप जितने अच्छे श्रोता बनेंगे आप अपने बच्चे से इमोशनली उतने ही करीब होंगे। इस वजह से आपका बच्चा अपने दिल की कोई बता आपसे करने से नहीं कतराएगा।
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डाइट करें अच्छी:
आजकल की बिगड़ती जीवनशैली और खराब खान पान भी पैनिक अटैक का एक मुख्य वजह है। इसलिए, जितन होआ कसे अपने बच्चों की डाइट बेहतर करें। उनकी डाइट में विटामिन फाइबर, प्रोटीन और मिनरल्स को शामिल करें। साथ ही बाहर का खाना कम से कम खाने दें।
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योग और मेडिटेशन करवाएं:
अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा हेल्दी और फिट होने के साथ पैनिक अटैक या एंजायटी जैसी गंभीर स्थिति से डील कर पाए तो उसकी जीवनशैली में योग और मेडिटेशन शामिल करें।