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Highlights
- अबू सलेम को कोर्ट ने 3 साल जेल की सजा सुनाई है।
- अबू सलेम ने 1993 में यह फर्जी पासपोर्ट बनवाया था।
- पुर्तगाल से प्रत्यर्पित होने के बाद से ही सलेम जेल में है।
Abu Salem News: फर्जी पासपोर्ट मामले में पूर्व अंडरवर्ल्ड डॉन अबू सलेम को 3 साल जेल की सजा सुनाई गई है। लखनऊ में CBI की विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट समृद्धि मिश्रा ने मंगलवार को अबू सलेम को सजा सुनाई। इस मामले में अबू सलेम के अलावा एक अन्य दोषी परवेज आलम को भी सजा सुनाई गई है। अबू सलेम उर्फ अब्दुल कयूम अंसारी ने अपने सहयोगियों परवेज आलम और समीरा जुमानी के साथ 1993 में लखनऊ पासपोर्ट ऑफिस में अकील अहमद आजमी के नाम से पासपोर्ट के लिए अप्लाई किया था। सलेम ने अप्लिकेशन के साथ फर्जी नाम और पते के जाली दस्तावेज चिपकाए थे।
फर्जी पासपोर्ट का अबू सलेम ने किया था इस्तेमाल
अबू सलेम ने तमाम तिकड़मों के बाद पासपोर्ट हासिल भी कर लिया और बाद में उसका इस्तेमाल भी किया। मामले की जांच के बाद सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की थी। कोर्ट ने इसका संज्ञान लेते हुए 5 जून 2009 को सलेम के खिलाफ आरोप तय किए थे। बता दें कि सलेम को 1995 में बिल्डर प्रदीप जैन की हत्या में दोषी पाए जाने के बाद 2015 में टाडा अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। बता दें कि मुंबई में 1993 के सीरियल बम ब्लास्ट (Mumbai Bomb Blast) मामले के फरार अपराधी अबू सलेम को अक्टूबर 2002 में पुर्तगाल से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया था।
वकील पिता की मौत के बाद किया मैकेनिक का काम
उत्तर प्रदेश में आजमगढ़ जिले का निवासी अबू सलेम भारत प्रतयर्पित होने के बाद से मुंबई की जेल में ही है। पुर्तगाल से प्रत्यार्पण की शर्त के मुताबिक उसको 25 साल बाद जेल से रिहा किया जाना था। अबू सलेम के पिता वकील थे, और बचपन में ही पिता की सड़क दुर्घटना में मृत्यु होने के बाद परिवार की जिम्मेदारी अपने बड़े भाई के साथ-साथ सलेम पर भी आ गई थी। परिवार का पेट पालने के लिए सलेम मैकेनिक का काम करने लगा और कुछ समय बाद घर छोड़कर मुंबई चला गया। मुंबई से ही उसने अपराध की दुनिया में कदम रखा और इंटरनेशनल डॉन दाउद इब्राहिम की सरपरस्ती में कई वारदातों में शामिल रहा।