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Anti Conversion Law: कांग्रेस करती रही विरोध, कर्नाटक सरकार ने बना दिया धर्मांतरण रोधी कानून, आखिर क्यों Congress कर रही थी ऐसा

Anti Conversion Law: कर्नाटक विधान परिषद में गुरुवार को एंटी कन्वर्जन बिल को पारित कर दिया गया। अब कर्नाटक में भी किसी का धर्म परिवर्तन कराना कानूनी अपराध माना जाएगा।

Edited By: Ravi Prashant @iamraviprashant
Published : Sep 16, 2022 05:51 pm IST, Updated : Sep 16, 2022 06:53 pm IST
Anti Conversion Law- India TV Hindi
Image Source : PTI Anti Conversion Law

Highlights

  • देश का 11वां राज्य बन गया है
  • धर्म जबरन परिवर्तन कराना गैरकानूनी माना जाएगा
  • कांग्रेस के सभी सदस्य सदन से वाकआउट कर गए

Anti Conversion Law: कर्नाटक विधान परिषद में गुरुवार को एंटी कन्वर्जन बिल को पारित कर दिया गया। अब कर्नाटक में भी किसी का धर्म परिवर्तन कराना कानूनी अपराध माना जाएगा। कर्नाटक में धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार सुरक्षा विधेयक को राज्य विधानसभा में पिछले साल दिसंबर में पारित कर दिया था लेकिन यह विधेयक अभी तक विधान परिषद में काफी समय से लंबित पड़ा था। अब कर्नाटक भी देश का 11वां राज्य बन गया है, जहां किसी का धर्म जबरन परिवर्तन कराना गैरकानूनी माना जाएगा। 

कांग्रेस ने इस बिल का किया विरोध

विधान परिषद में जब इस बिल पर चर्चा हुई तो कांग्रेस ने हंगामा मचा दिया। जिसके बाद कांग्रेस के सभी सदस्य सदन से वाकआउट कर गए। प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने इस बिल का जमकर विरोध किया हालांकि इन सबके बीच भाजपा बिल को पारित कराने में सफल रही। वहीं कानून मंत्री जेसी मधुस्वामी ने विपक्ष की आलोचनाओं करते हुए जमकर बरसे। कानून मंत्री ने कहा कि हम किसी की आजादी पर निशाना नहीं साध रहे हैं बल्कि जबरन धर्मांतरण पर प्रतिबंध लगाने के लिए यह बिल लाए हैं। इस बिल को पिछले साल दिसंबर में विधानसभा में पेश किया गया था विधानसभा में विपक्षी पार्टियों ने इस विधेयक का काफी विरोध किया था। विपक्षी पार्टियों का कहना था कि इस बिल से एक खास समुदाय को निशाना बनाने की कोशिश की जा रही है। इन सब के बावजूद भी विधानसभा में यह विधेयक पास हो गया था। 

क्या कहता है कर्नाटक का धर्मांतरण कानून
दोनों सदनों में पारित होने के बाद राज्यपाल के मुहर लगने के साथ ही कानून का रूप ले लेगा। इस कानून में धर्म की आजादी के अधिकार की सुरक्षा और बलपूर्वक अनुसूचित प्रभाव जबरदस्ती, प्रलोभन या किसी  एक धर्म से दूसरे धर्म को अपनाने के लिए प्रेरित किया जाता है तो यह बिल्कुल गैरकानूनी होगा। उदाहरण के तौर पर कुछ इस तरह से समझे।

1. विवाह के लिए धर्म परिवर्तन की जरूरत नहीं है। कानून के मुताबिक, धर्म बदलने के लिए यदि कोई विवाह करता है तो उसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके अलावा किसी से जबरन विवाह करने के लिए कोई लड़का या लड़की का धर्म परिवर्तन कराएगा तो वह भी कानून अपराध माना जाएगा। 

2. कानून की धारा-3 में जबरन धर्म परिवर्तन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा गया है, इसमें बताया गया है कि धारा-3 का उल्लंघन करने वाले पीड़ित व्यक्ति स्वेच्छा से शिकायत कर सकता है। इसके अलावा पीड़ित व्यक्ति के माता-पिता, भाई-बहन या उससे ब्लड रिलेशन रखने वाले किसी भी रिश्तेदार की शिकायत पर एफआईआर (FIR) दर्ज करवाई जा सकती है। 

3. किसी नाबालिग महिला या sc-st व्यक्ति का धर्मांतरण जबरन करने पर या बिना उसकी इजाजत के बगैर धर्म परिवर्तन को गैरकानूनी माना जाएगा। इस तरह के मामलों में धर्म परिवर्तन कराने में दोषी माने गए, उस व्यक्ति को 3-10 साल तक की जेल की हवा खानी पड़ सकती है। इसके अलावा एक 1 लाख का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। 

4. जबरन धर्मांतरण साबित होने पर पीड़ित व्यक्ति को 5 लाख तक रुपए का मुआवजा दिया जाएगा। इसके अलावा जुर्माने की राशि भी उसे ही दी जाएगी। साथ ही साथ ऐसे विवाह को फैमिली कोर्ट में अमान्य मान ली जाएगी। अगर जिले में फैमिली कोर्ट नहीं है तो पारिवारिक मामलों की सुनवाई करने वाली अदालत को इसका अधिकार होगा। 

इन 10 राज्यों में पहले से बने हैं कानून
एंटी कन्वर्जन लव बनाने वाला कर्नाटक देश का 11 वां राज्य बन गया है। इससे पहले ओडिशा में 1967 में इस कानून को लागू कर दिया गया था। वही हरियाणा में इस कानून को 2022 में लागू किया गया। इसके अलावा मध्य प्रदेश 1967 अरुणाचल प्रदेश 1978 छत्तीसगढ़ 2000 गुजरात 2003 हिमाचल प्रदेश 2006 झारखंड 2017 उत्तराखंड 2018 और उत्तर प्रदेश 2021 में भी यह कानून लागू है। आपको बता दें कि गुजरात में साल 2003 में और छत्तीसगढ़ में साल 2006 में साथ ही साथ हिमाचल प्रदेश में इन कानूनों को संशोधित कर काफी कड़े कानून के रूप में बनाया गया।

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