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कूनो के बाद अब इस जगह बसाए जाएंगे चीते, आधा दर्जन से ज्यादा चीते दिसंबर में अफ्रीका से आ सकते हैं भारत

प्रोजेक्ट चीता में स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। उन्हें रोजगार के विभिन्न अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। देश में चीता पुर्नस्थापन हेतु मध्य प्रदेश के गांधी सागर अभ्यारण्य में आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं।

Written By: Sudhanshu Gaur @SudhanshuGaur24
Published : Sep 18, 2023 11:07 pm IST, Updated : Sep 18, 2023 11:23 pm IST
MADHYA PRADESH- India TV Hindi
Image Source : FILE कूनो के बाद अब इस जगह बसाए जाएंगे चीते

मंदसौर: भारत सरकार का प्रोजेक्ट चीता अब अपने अगले चरण की तरफ बढ़ चुका है। मध्य प्रदेश में कूनो नेशनल पार्क के बाद मंदसौर जिले का गांधी सागर अभ्यारण्य चीतों के बसने का दूसरा ठिकाना बनने वाला है। इसकी तैयारी भी जोरों से जारी है। जानकारी के अनुसार, चीतों का दल दिसंबर या जनवरी में आ सकता है। इसके लिए सभी तैयारियां जारी हैं। पानी का बेहतर इंतजाम रहे, हरियाली रहे, इसके प्रयास चल रहे हैं। यहां छह से 10 चीतों का दल आ सकता है।

कूनो में अब केवल 15 चीते ही शेष

बता दें कि पिछले साल 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर कूनो नेशनल पार्क में दक्षिण अफ्रीका से लाए हुए चीतों के पहले दल को छोड़ा गया था, यहां कुल 20 चीते लाए गए। वहीं, एक मादा चीता ने चार शवको जन्म दिया। कुल मिलाकर चीतों की संख्या 24 हो गई थी। मगर, नौ चीतों की अब तक हुई मौत के बाद यहां 15 चीते ही शेष रह गए हैं।

चीतों की बसाहट का अभियान सफल होता नजर आ रहा

कूनो नेशनल पार्क में चीतों की बसाहट का अभियान सफल होता नजर आ रहा है और यही कारण है कि मंदसौर के गांधी सागर अभ्यारण्य में भी दक्षिण अफ्रीका से चीतों को लाने की तैयारी चल रही है। यहां बाकायदा फेंसिंग की जा रही है और लगभग 67 वर्ग किलोमीटर में बाड़ा भी तैयार किया जा रहा है। चीता प्रोजेक्ट भारत सरकार, नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका के शीर्ष अधिकारियों, वैज्ञानिकों, वन्य जीव विशेषज्ञ, वन्य प्राणी चिकित्सक, संयुक्त दल के मार्गदर्शन में क्रियान्वित किया गया।

चीतों की मौत के बाद उठने लगे सवाल

भारत से विलुप्त होने के 70 साल बाद चीतों को अफ्रीका से एक बार फिर देश में लाया गया था। उस समय पूरे देश में ये चीते चर्चा का विषय थे। हालांकि चीतों की लगातार हो रही मौत कई तरह के सवाल खड़े करती है। सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई को कहा था कि कूनो नेशनल पार्क में एक साल से भी कम समय में 8 चीतों की मौत हो जाना एक ‘सही तस्वीर’ पेश नहीं करता। इसने केंद्र से इसे प्रतिष्ठा का मुद्दा नहीं बनाने और इन वन्यजीवों को अन्य अभयारण्यों में भेजने की संभावना तलाशने को कहा था। हालांकि एक्सपर्ट्स का चीतों की मौत को लेकर कुछ और ही कहना है।

‘फर की वजह से हो रही चीतों की मौत’

चीता परियोजना से जुड़े इंटरनेशनल एक्सपर्ट्स ने दावा किया है कि अफ्रीका की सर्दियों के आदी चीतों के ‘फर’ की मोटी परत विकसित होने की प्राकृतिक प्रक्रिया, भारत की नमी युक्त और गर्म मौसमी परिस्थितियों में उनके लिए प्राणघातक साबित हो रही है। सरकार को सौंपी रिपोर्ट में एक्सपर्ट्स ने चीतों के फर को काटने की सलाह दी है ताकि उन्हें प्राणघातक संक्रमण और मौत से बचाया जा सके। चीते की मौत का सबसे नवीनतम मामला बुधवार को सामने आया। विशेषज्ञों ने कहा कि फर की मोटी परत परजीवियों और नमी से होने वाले त्वचा रोग के लिए आदर्श परिस्थिति है।

 

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