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कर्नाटक: CM सिद्धारमैया के खिलाफ MUDA केस में शिकायत दर्ज कराने वाले को 6 महीने जेल की सजा, जानें पूरा मामला

वर्ष 2015 में स्नेहमयी कृष्णा ने अखबार चलाने और घरेलू जरूरतों के लिए कुमार नाम के व्यक्ति से कर्ज लिया था, इसके बदले में उसने मर्चेंट्स को-ऑपरेटिव बैंक का चेक दिया था।

Reported By : T Raghavan Edited By : Niraj Kumar Published : Jan 31, 2025 15:58 IST, Updated : Jan 31, 2025 17:14 IST
CM Siddaramaiah
Image Source : PTI/FILE सिद्धारमैया

मैसूरु: मुडा जमीन आवंटन मामले में कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने वाले एक्टिविस्ट को चेक बाउंस के मामले में 6 महीने की सजा सुनाई गई है। एक्टिविस्ट स्नेहमयी कृष्णा को चैक बाउंस मामले में 6 महीने जेल की सजा हुई है। मैसूरु के थर्ड जेएमएफसी कोर्ट ने ये फैसला सुनाया है।

वर्ष 2015 में स्नेहमयी कृष्णा ने अखबार चलाने और घरेलू जरूरतों के लिए कुमार नाम के व्यक्ति से कर्ज लिया था, इसके बदले में उसने मर्चेंट्स को-ऑपरेटिव बैंक का चेक दिया था।  जब कुमार ने इसे अपने बैंक खाते में जमा किया तो वह बाउंस हो गया। बाद में उन्होंने कृष्णा के खिलाफ केस दर्ज कराया। इसी मामले में स्नेहमयी कृष्णा को सजा सुनाई गई है।

ईडी की रिपोर्ट में मनी लॉन्ड्रिंग की ओर इशारा

MUDA जमीन आवंटन मामले की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जांच में आरोप लगाया गया है कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया की पत्नी पार्वती बी.एम.को मैसूरु के सभ्रांत इलाके में 14 भूखंड ‘‘अवैध रूप से आवंटित’’ किये गए थे और मनी लॉन्ड्रिंग का प्रयास किया गया था। ईडी द्वारा जारी अनंतिम कुर्की आदेश (पीएओ) में इन 14 भूखंडों का कथित तौर पर धन शोधन के लिए इस्तेमाल करने की कार्यप्रणाली की विस्तृत जानकारी दी गई है। ईडी के आरोपों पर मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और उनके परिवार की ओर से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण (एमयूडीए) मामले में याचिकाकर्ता, कार्यकर्ता स्नेहमयी कृष्णा ने 104 पन्नों के पीएओ की प्रति न्यूज एजेंसी पीटीआई के साथ शेयर की है। इस आदेश के अनुसार, ‘‘अवैध आवंटन प्रभाव में आकर किया गया था।’’ हालांकि, यह स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया कि किसके प्रभाव में किया गया।

 ईडी ने दावा किया कि पार्वती ने धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत जांच शुरू होने के बाद इन 14 भूखंडों को वापस कर दिया। ईडी ने आरोप लगाया, ‘‘भूखंडों का अवैध आवंटन कोई एक घटना नहीं है। एमयूडीए अधिकारियों/कर्मचारियों और रियल एस्टेट कारोबारियों/प्रभावशाली व्यक्तियों के बीच गहरी सांठगांठ है। एमयूडीए अधिकारियों/कर्मचारियों द्वारा नकदी, अचल संपत्तियों, वाहनों आदि के बदले में बड़ी संख्या में अवैध आवंटन किये गए।’’ ईडी ने आरोप लगाया कि हालांकि पार्वती ने भूखंडों को एमयूडीए को वापस कर दिया है, लेकिन जांच से यह स्पष्ट है कि मामले के आरोपियों द्वारा धन शोधन का प्रयास किया गया था। आरोपियों में सिद्धरमैया, उनकी पत्नी पार्वती, उनके भाई मल्लिकार्जुन स्वामी, जमीन के मालिक जे देवराजू और एमयूडीए के अधिकारी, रियल एस्टेट कारोबारी और प्रभावशाली व्यक्ति शामिल हैं। ईडी के अनुसार, ‘‘जांच से पता चला है कि लगभग 1,095 एमयूडीए भूखंडों को अवैध रूप से आवंटित किया गया।’’ (इनपुट-भाषा)

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