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प्रद्युम्न मर्डर केस: क्या पुलिस ने रेयान इंटरनेशनल स्कूल के कंडक्टर को जानबूझकर फंसाया?

सीबीआई ने दावा किया है कि 11वीं के छात्र ने स्कूल की परीक्षा और शिक्षक-अभिभावक बैठक टलवाने के लिए प्रद्युम्न की हत्या की। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि पुलिस एसआईटीम की जांच आखिर क्यों बस कंडक्टर पर ही अटकी रही। पुलिस ने घटना के नौ घंटे बाद ही कंडक्टर क

Edited by: India TV News Desk
Published : Nov 09, 2017 01:16 pm IST, Updated : Nov 09, 2017 01:16 pm IST
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नई दिल्ली: रेयान इंटरनेशनल स्कूल में हुए प्रद्युम्न मर्डर केस में सीबीआई की नई थ्योरी सामने आने के बाद गुरुग्राम पुलिस ने बहानेबाजी शुरू कर दी है। सच को झूठ और झूठ को सच बनाने के खुलासे के बाद गुरुग्राम पुलिस पर कई सवाल उठ रहे हैं। आज गुरुग्राम के पुलिस कमिश्नर मीडिया के सामने आए लेकिन उनके सुर बदले हुए थे। जो पुलिस कमिश्नर पहले ताल ठोक कर कह रहे थे कि वो सात दिन में केस की चार्जशीट दायर कर देंगे आज उन्होंने कहा वो सबूत इकट्ठा कर रहे थे इससे पहले ही केस की जांच सीबीआई को सौंप दी गई।

सीबीआई ने दावा किया है कि 11वीं के छात्र ने स्कूल की परीक्षा और शिक्षक-अभिभावक बैठक टलवाने के लिए प्रद्युम्न की हत्या की। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि पुलिस एसआईटीम की जांच आखिर क्यों बस कंडक्टर पर ही अटकी रही। पुलिस ने घटना के नौ घंटे बाद ही कंडक्टर को हिरासत में ले लिया था। ऐसे में बड़ा सवाल है कि क्या गुरुग्राम पुलिस मामले की जांच में जल्दबाजी की और नीचे के अधिकारियों पर ज्यादा भरोसा किया।

गुरुग्राम के पुलिस कमिश्नर संदीप खिरवार ने कहा कि हमने शुरुआती जांच में आशोक को गिरफ्तार किया था। प्रद्युम्न मामले की जांच चल रही थी। अशोक को गिरफ्तार करना हमारा अंतिम फैसला नहीं था। जांच के दौरान जो सुराग मिले उनके आधार पर जांच की जा रही थी। पुलिस की जांच के अनुसार टॉयलेट में अशोक चाकू लेकर साफ करने गया था और बच्चे को देखकर उसकी नियत बिगड़ गई। आरोपी ने बच्चे की गला रेतकर हत्या कर दी। माली और बच्चों के बयान के आधार पर पुलिस ने अशोक को कातिल ठहरा दिया।

मामले की जांच में डीसीपी साउथ अशोक बख्शी के नेतृत्व में तीन एसीपी को सौंपी गई थी। पूरी टीम मामले के तथ्यों की जांच कर रही थी। ऐसे में सवाल उठता है कि भारी भरकम पुलिस अधिकारियों की नजर आरोपी छात्र के पर क्यों नहीं पहुंची, क्या पुलिस के ऊपर किसी प्रकार का दबाव था। जिसमें जल्दबाजी में सबसे कमजोर को निशाना बनाया गया।

अशोक गरीब था और हर तरीके से कमजोर। पुलिस के स्थानीय अधिकारियों के साथ उच्चाधिकारियों पर भी अब सवाल उठ रहे हैं क्योंकि एडीजीपी स्तर के अधिकारी ने भी मामले को देखा। अब हर ओर पुलिस की किरकिरी हो रही है। दूसरी ओर बच्चे के पिता बरुण ठाकुर पुलिस की थ्योरी पर सवाल उठा रहे थे। सरकार ने मामले को सीबीआई को सौप दिया और जिसने 22 सितंबर को जांच शुरू कर दी थी।

इधर, सीबीआई प्रद्युम्न मर्डर केस में गिरफ्तार आरोपी से आज भी पूछताछ कर रही है। कल जुवेनाइल कोर्ट ने आरोपी को सीबीआई कस्टडी में भेज दिया था।

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