नई दिल्ली: इसरो ने श्रीहरिकोटा से कम्यूनिकेशन सैटेलाइटन जीसैट-19 और जीसैट-11 को जियो-स्टेशनरी सैटेलाइट प्रक्षेपण यान GSLV MK-3 के जरिए सफलतापूर्वक लॉन्च कर एक नया इतिहास रच दिया है। इस प्रक्षेपण के साथ ही डिजिटल भारत को मजबूती मिलेगी तथा ऐसी इंटरनेट सेवाएं मिलेगी जैसे कि पहले कभी नहीं मिलीं। जीसैट-19 उपग्रह को अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र अहमदाबाद में बनाया गया है।
जियो-स्टेशनरी सैटेलाइट लॉन्चिंग वीइकल मार्क-3 को भविष्य का अंतरिक्ष यान बताया जा रहा है। इसकी प्लानिंग इसरो के पूर्व चेयरमैन के कस्तूरीरंगन ने की थी। इसे तैयार करने में कुल 15 साल का समय लगा। इस रॉकेट की कुल लागत 300 करोड़ रुपये है। इसका वजन 640 टन यानी 200 हाथियों या पांच लोडेड बोइंग जंबो प्लेन के बराबर है। इसमें ईंधन के तौर पर लिक्विड हाइड्रोजन और ऑक्सिजन का इस्तेमाल किया गया है। इसकी लंबाई 43 मीटर है।
G-SAT-19 में कोई ट्रांसपॉन्डर नहीं है। पहली बार इसकी जगह मल्टीपल फ्रीक्वेंसी बीम का इस्तेमाल किया गया है जिससे इंटरनेट स्पीड और कनेक्टिविटी बढ़ जाएगी। G-SAT-19 का वजन 3 टन है जो कि सबसे भारी सैटेलाइट है। अंतरिक्ष में फिलहाल भारत के 13 सैटेलाइट्स हैं।
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