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Karnataka: गरीब ब्राह्मणों की शादी के लिए 3 लाख से 50 हजार तक की मदद, जानिए क्या है शर्तें

 कर्नाटक की 6 करोड़ जनसंख्या में से करीब तीन फीसदी ब्राह्मण समुदाय की है। राज्य में ब्राह्मण विकास बोर्ड द्वारा शुरू की गई ये दोनों योजनाएं कांग्रेस सरकार द्वारा साल 2013 में शुरू की गई शादी भाग्य स्कीम की तर्ज पर है, जिसके तहत गरीब अल्पसंख्यक परिवारों से आने वाली महिलाओं की शादी के लिए 50,000 रुपये की मदद की जाती थी। 

Written by: IndiaTV Hindi Desk
Published : Jan 08, 2021 09:17 am IST, Updated : Jan 08, 2021 09:17 am IST
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Image Source : FILE Representational Image

बेंगलुरु. कर्नाटक राज्य ब्राह्मण विकास बोर्ड ने शादियों की दो स्कीम्स को पायलट बेसिस पर लॉन्च करने की मंजूरी प्राप्त कर ली है। इनमें से एक स्कीम के तहत 25 ब्राह्मण युवतियों को गरीब पुजारियों से शादी करने पर 3 लाख रुपये के फाइनेंसियल बॉंड्स दिए जाएंगे और दूसरी स्कीम के तहत समुदाय के गरीब परिवारों की 550 महिलाओं को उनकी शादी पर 25000 रुपये की मदद की जाएगी। बोर्ड के चेयरमैन और भाजपा के नेता H S Sachidananda Murthy ने बताया कि हमें योजनाओं को लॉन्च करने की मंजूरी मिल गई है - अरुंधति और मैत्रेयी - और इनके लिए फंड अलग-अलग निर्धारित किए गए हैं।

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उन्होंने बताया कि इन फंडों का लाभ उठाने के लिए आगे की दिशा में काम किया जा रहा है। यह समुदाय के कमजोर वर्गों की सहायता करने के हमारे प्रयासों का हिस्सा है। अरुंधति योजना के तहत, गरीब पृष्ठभूमि की 550 ब्राह्मण महिलाओं को उनकी शादी के लिए 25,000 रुपये दिए जाएंगे। मैत्रेयी योजना के तहत, ऐसी 25 महिलाओं को 3 लाख रुपये का वित्तीय बॉन्ड दिए जाएंगे, जो गरीब पृष्ठभूमि के ब्राह्मण पुजारियों से शादी करती हैं। इन बॉंड्स का उपयोग तीन साल के भीतर करना होगा। 

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मूर्ति ने आगे बताया, "प्रारंभ में, बीपीएल ब्राह्मण किसानों या रसोइया या पुजारियों से शादी करने वाली दुल्हन के नाम पर 3 लाख रुपये के वित्तीय बंधन के साथ मैत्रेयी योजना प्रस्तावित की गई थी। हालांकि, राज्य भर में अपने दौरे के दौरान, मैंने पाया कि पुजारी आर्थिक रूप से बहुत कमजोर थे और फिर हमने ये योजना उनसे ही शुरू करने का फैसला किया। मैत्रैयी योजना के तहत 3 लाख रुपये के बॉड्स का लाभ तीन साल के अंदर दिया जाएगा। हर साल एक लाख रुपये किस्त के रूप में दिए जाएंगे।"

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आपको बता दें कि कर्नाटक की 6 करोड़ जनसंख्या में से करीब तीन फीसदी ब्राह्मण समुदाय की है। राज्य में ब्राह्मण विकास बोर्ड द्वारा शुरू की गई ये दोनों योजनाएं कांग्रेस सरकार द्वारा साल 2013 में शुरू की गई शादी भाग्य स्कीम की तर्ज पर है, जिसके तहत गरीब अल्पसंख्यक परिवारों से आने वाली महिलाओं की शादी के लिए 50,000 रुपये की मदद की जाती थी। येदियुरप्पा ने तब इस योजना की आलोचना करते हुए कहा था कि इसे सभी समुदायों के गरीबों को लाभ पहुंचाने के लिए विस्तारित किया जाना चाहिए।

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मूर्ति के अनुसार, गरीब ब्राह्मण परिवारों के छात्रों को छात्रवृत्ति, शुल्क के भुगतान और यूपीएससी जैसी परीक्षाओं के प्रारंभिक चरण में उत्तीर्ण करने वालों को प्रशिक्षण प्रदान करने में मदद करने के लिए 14 करोड़ रुपये अलग रखे गए हैं। ब्राह्मण विकास बोर्ड की योजनाओं का लाभ उठाने के लिए, आवेदकों को यह प्रमाणित करना होगा कि उनके पास पांच या अधिक एकड़ कृषि भूमि नहीं है, एक आवासीय फ्लैट जो कि 1,000 वर्ग फुट से अधिक नहीं है, वे पिछड़े वर्गों या अनुसूचित वर्ग के नहीं हैं और परिवार की आय 8 लाख रुपये प्रति वर्ष से कम है।

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