
Pariksha Pe Charcha 2025: परीक्षा पे चर्चा के आज के स्पेशल एपिसोड में अभिनेता विक्रान्त मेस्सी और अभिनेत्री भूमि पेडनेकर ने स्टूडेंट्स से वार्ता की। इस दौरान विक्रान्त मेस्सी ने स्टूडेंट्स को अपने आपको एक्सप्रेस करने की सलाह दी। मेस्सी ने कहा कि आपको अपने मन की बात अपने पेरेंट्स के सामने रखने चाहिए। इस दौरान विक्रान्त मेस्सी ने अपने बारे में बताते हुए कहा, "मैं पढ़ाई में एवेरज और अबव एवरेज स्टूडेंट था। खेल-कूद में ज्यादा ध्यान रहता था, लेकिन परीक्षा के टाइम पे दो हफ्ते पहले किताब उठ लेते थे, दस दिन पहले किताब उठा लेते थे। हमारे टाइम पे केबल टीवा होता था तो केबल काट दिया जाता था। तो घर का माहौल एग्जामिनेशन जैसा हो जाता था, कर्फ्यू सा लग जाता था।"
उन्होंने आगे कहा, "सिर्फ पास होने के लिए नहीं पढ़ना है, ज्ञान प्राप्त करने के लिए पढ़ना है और जैसे प्रधानमंत्री मोदी जी कहते हैं कि नॉलेज इज पावर, जोकि सच है। आज की जो जेनेरेशन है उसे देखकर थोड़ी निराशा होती है। हमारा प्लेटाइम होता था मैदान में जाकर खेलना और आज की जेनेरेशन का प्लेटाइम क्या है- मोबाइल।"
'हम सब subconsciously विजुलाइज करना जानते हैं'
विक्रान्त मेस्सी ने पॉवर ऑफ विजुलाइजेशन को लेकर कहा कि हम सब subconsciously विजुलाइज करना जानते हैं। इसको उन्होंने एक्सरसाइज करके समझाया। उन्होंने कहानी सुनाई,"एक लड़का है जो अपनी साइकल पर बैठा है, साइकल चला रहा है। एक समय पर उसेक पहचान वाले उसे मिलते हैं वो रुकता है उनको नमस्ते करता है, उनका हाल चाल लेकर आगे बढ़ जाता है।" फिर उन्होंने कहा, "अब ध्यान देते हैं पॉवर ऑफ विजुलाइजेशन पर। आप मुझें बताएं उसकी कमीज का कलर क्या था- रेड, ब्लैक, स्काईब्लू। हम सब ने एक ही कहानी सुनी लेकिन हम सब ने विजुलाइज जो किया वो अलग-अलग किया। किताबों के साथ भी ऐसा होता है। अगर हम एक ही किताब बैठकर पढ़ेंगे, हम सब की विजुलाइजेशन अलग-अलग होगी।"
जर्नलिंग को लेकर विक्रान्त मेस्सी ने क्या कहा?
जर्नलिंग को लेकर कहा, "दिन के दस मिनट निकालने हैं या हफ्ते के 40 मिनट निकालने हैं। अगर आप लिखने लग जाएंगे आप रियलाइज करेंगे वो भी एक तरह का मेनिफेस्टेशन है। एक सवाल का जवाब देते हुए विक्रान्त मेस्सी ने कहा, "जो एक्सपेक्टेशन आपन अपने बच्चों पर डाली है वो बर्डन जिस दिन लगने लग जाती है तो वे ग्रो करने के एबल नहीं रहते। अपने आपको एक्सप्रेस करें। आपको अपने मन की बात अपने पेरेंट्स के सामने रखने चाहिए। वो मानेंगे, क्योंकि पेरेंट्स अपने बच्चों की खुशी चाहते हैं।
'मैं बहुत ही ओबिडिएंट स्टूडेंट थी'
भूमि पेडनेकर ने अपने बारे में बताते हुए कहा, "मैं बहुत ही ओबिडिएंट स्टूडेंट थी। मैं अभी भी वैसी ही हूं। मेरी रिलेशनशिप टीचर्स के साथ बहुत-बहुत खूबसूरत थी। मैं कभी फर्स्ट बैंचर बच्ची नहीं थी। स्कूल आपके लिए इसलिए इतना इंपोर्टेंट होता है क्यों कि आपका फाउंडेशन वहां बनता है। मुझे छोटी उम्र में पता चल गया था कि मुझे अभिनेत्री बनना है। लेकिन मैं स्टूडेंट अच्छी थी। मैं मेहनत बहुत करती थी, मैं बहुत मेहनती स्टूडेंट थी।"
अभिनेत्री ने कहा, "एग्जाम के दौरान अगर आप मुझे देखते, तो मैं दिन में एक घंटे का ब्रेक लेती थी। जहां पे मैं बाहर जाकर खेलती थी, मुझे डांस करना, बैडमिंटने खेलेने का बहुत शौक था। क्योंकि वो मेरे ब्रेन को ब्रेक देने के लिए जरूरी था।"
भूमि पेडनेकर ने स्लीप को लेकर क्या कहा?
उन्होंने आगे कहा, "जब मुझे छोटी थी तो मुझे लगता था मुझे लेट तक जागना है। अब जब मैं शूटिंग करती हूं, जैसे ही लंच ब्रेक होता है तो मैं जल्दी-जल्दी 15मिनट में अपना खाना खा लेती हूं और कम से कम कम आधे घंटे सोती हूं क्यों कि वो आधे घंटे की नींद मुझे आठ घंटे की नींद मुझे बहुत फोकस्ड काम देगा।" उन्होंने आगे कहा कि जब चुनौती आपके सामने आए तो आपको ये याद रखना होगा कि आपके क्या स्ट्रेंथ हैं और उनपर खेलना होगा।