
नई दिल्ली: इंडिया टीवी स्पीड न्यूज एजुकेशन कॉन्क्लेव का आयोजन शुरू हो चुका है। इस कॉन्क्लेव में शिक्षा से जड़े तमाम मुद्दों पर चर्चा हो रही है। न्यू एजुकेशन पॉलिसी (NEP) यानी नई शिक्षा नीते इन्हीं मुद्दों में से एक मु्द्दा है, जिस पर आज इस कॉन्क्लेव में एनसीईआरटी के पूर्व निदेशक जेएस राजपूत और शहीद सुखदेव कॉलेज ऑफ बिजनेस स्टडीज की प्रिंसिपल प्रो. पूनम वर्मा चर्चा ने चर्चा की।
'21वीं सदी तेजी की'
इस दौरान एक सवाल का जवाब देते हुए एनसीईआरटी के पूर्व निदेशक जेएस राजपूत ने कहा कि 20वीं सदी चेंज की थी। 21वीं सदी तेजी की है।" उन्होंने आगे कहा, "नई एजुकेशन पॉलिसी में कुछ चीजें बहुत महत्वपूर्ण हैं। जो भी आपका अध्ययन है उसे अपने लोगों से जोड़िए, अपनी संस्कृति से जोड़ि, कल्चर से जोड़िए। दुनियाभर में माना जाता है। इस तरह की चीजों के आधार पर ये शिक्षा बनी है, ज्ञान समाज के लिए बनी है। परिवर्तन को समझने के लिए बनी है। अपनी संस्कृति और अपने आधार के लिए बनी है।"
"85प्रतिशत विकास 7-8 साल तक हो जाता है, ये शिक्षा में नीति में लिखा है। इसलिए हमने पूरी स्ट्रक्चर बदली। तीसरे चौथे साल में आप ये पता लगा सकते हैं कि बच्चा क्या बनना चाहते हैं। तीन साल में इस बात का अंदाज लगा सकते हैं"
पूर्व निदेशक ने कहा, "दुनिया में वही देश जहां शिक्षक और विद्यार्थी अनुपात सही है, जहां शिक्षक विद्यार्थी की व्यक्तिगत रुचि को समझ सकता है, इंडिविजुअल अंतर को समझ सकते हैं, वो आगे बढ़ते हैं। जिस देश की स्कूल की शिक्षा अच्छी हो गई वो देश आगे बढ़ जाएगा।"
एक सवाल का उत्तर देते हुए एनसीईआरटी के पूर्व निदेशक ने कहा, "मुझे हंसी आती है अज्ञानता पर। थ्री लैंग्वेज फॉर्मूला 1968 कोठारी कमीशन पॉलिसी के आधार पर बना था। संसद ने उसे स्वीकृत किया था। उसके बाद एक शिक्षा नीति 1986 में बनी, 1992 में रिवाइज हुई और अब 2020 हम कर रहे हैं। सन 2000 में NCERT ने Curricullum फॉर्मूला बनाया। इनमें किसी में से थ्री लैंग्वेज फॉर्मूला में कोई चेंज नहीं हुआ है। एक भाषा थोपने का कोई प्रश्न नहीं उठता है।"
लाइफलॉन्ग प्रिपेयर करने के लिए ये पॉलिसी बनी है- प्रो. पूनम वर्मा
शहीद सुखदेव कॉलेज ऑफ बिजनेस स्टडीज की प्रिंसिपल प्रो. पूनम वर्मा ने कहा, "दो साल हमें भा लगा गए एक स्ट्र्क्चर को बनाने में। लाइफ लॉन्ग प्रिपेयर करने के लिए ये पॉलिसी बनी है।"
प्रो. पूनम वर्मा ने कहा, "शिक्षक को स्टूडेंट्स की एस्पिरेशन(रिक्वायरमेंट, जरूरत) समझनी चाहिए, स्टूडेंट्स को वो एनवायरनमेंट देना चाहिए ताकि वे खुल कर अपनी बात कर सकें।"