Russia-Ukraine War: यूक्रेन में एक क्षेत्रीय अधिकारी ने कहा है कि रूसी बलों ने देश के पूर्वोत्तर में नागरिकों के काफिले पर गोलाबारी की, जिसमें 20 लोग मारे गए। खारकीव क्षेत्र के गवर्नर ओलेह सिनीहुबोव ने बताया कि शनिवार को उन लोगों पर हमले किये गये, जिन्हें गोलाबारी से बचाने के लिए वहां से हटाया जा रहा था। उन्होंने कहा कि यह ऐसी निर्मम कार्रवाई है जिसके न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता।
यूक्रेन के अनुसार काफिले पर हमला कुपिआंस्की जिले में किया गया। पिछले महीने यूक्रेन के एक सफल जवाबी हमले के बाद रूसी सेना खारकीव क्षेत्र के अधिकांश हिस्से से पीछे हट गई है, लेकिन इस क्षेत्र में गोलाबारी जारी रखी है। इस सप्ताह बमबारी काफी तेज हो गई, क्योंकि रूस ने अपने पूर्ण या आंशिक नियंत्रण के तहत पूर्व और दक्षिण में चार यूक्रेनी इलाकों को अपने कब्जे में ले लिया है।
एक दिन पहले भी हुई थी 30 नागरिकों की मौत
अभी एक दिन पहले भी रूसी गोलाबारी में यूक्रेन ने अपने 30 नागरिकों के मारे जाने और 88 लोगों के घायल होने की पुष्टि की थी। यूक्रेन ने रूस पर बर्बरता बरतने का आरोप लगाया था। लोगों की निर्मम हत्या पर रूस ने बिना कोई प्रतिक्रिया दिए हमले पर हमले कर रहा है। इसमें आम नागरिकों की जान भी जा रही है। इससे यूक्रेन में एक बार फिर दहशत का माहौल है। लोगों अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भाग रहे हैं। बताया जा रहा है कि रूसी गोलीबारी से बचाने के लिए यूक्रेन के संवेदनशील इलाकों से नागरिकों को हटाया ही जा रहा था कि उसी दौरान रूस ने बम गिरा दिया। इससे बेकसूर लोगों की जान चली गई।
शांति प्रस्ताव के बीच जुर्म ढा रहे पुतिन
राष्ट्रपति पुतिन ने रूस के चार महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर अपना अधिकार जमाने के बाद अब युद्ध विराम का संकेत दिया था। उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमिर जेलेंस्की के पास अब शांति का प्रस्ताव भेजा है। पुतिन ने कहा कि यूक्रेन को अब संघर्ष छोड़कर बातचीत की मेज पर आगे आए। यही इसका रास्ता है। मतलब साफ है कि यूक्रेन के चार राज्यों को रूस का पार्ट बनाने के बाद अब पुतिन आगे युद्ध नहीं चाहते हैं। मगर यूक्रेन के नागरिकों पर अब इस तरह का जानलेवा हमला करवाने के पीछे पुतिन की मंशा क्या हो सकती है। इस बारे में लोग सोचने को मजबूर हैं। क्या पुतिन जेलेंस्की पर बातचीत का दबाव बनाने के लिए यूक्रेनी नागरिकों पर हमला करवा रहे हैं। ताकि इससे जेलेंस्की घबराकर वार्तालाप को राजी हो जाएं। क्योंकि इससे पहले जेलेंस्की बार-बार अपने क्षेत्रों को रूस से वापस लौटाने की बात कहते रहे हैं। अपने क्षेत्रों पर दोबारा कब्जा नहीं मिलने तक यूक्रेन संघर्ष करते रहने का ऐलान भी करता रहा है। मगर अब देखना ये है कि इस ताजा घटनाक्रम के बाद यूक्रेन क्या निर्णय लेता है।
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