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Hindi News खेल अन्य खेल भारतीय हॉकी टीम के पास 44 साल पुराना इतिहास दोहराने का मौका, 1960 में भी किया था करिश्मा

भारतीय हॉकी टीम के पास 44 साल पुराना इतिहास दोहराने का मौका, 1960 में भी किया था करिश्मा

Hockey India: भारतीय हॉकी टीम ने पेरिस ओलंपिक 2024 के सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। अब गोल्ड ज्यादा दूर नहीं है। लेकिन टीम के सामने कुछ दिक्कतें भी हैं, जो जल्द ही दूर करनी होंगी।

indian hockey team - India TV Hindi Image Source : INDIA TV भारतीय हॉकी टीम के पास इतिहास दोहराने का मौका

 Paris Olympics 2024 Hockey India: हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी वाली भारतीय हॉकी टीम एक बार फिर से इतिहास दोहराने के मुहाने पर खड़ी है। हॉकी टीम ने अपने केवल 10 खिलाड़ियों के साथ ही ग्रेट ब्रिटेन जैसी मजबूत टीम को हराकर सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। अब टीम इंडिया का मुकाबला जर्मनी से होगा। जर्मनी से जीतते ही ना केवल भारत के पास गोल्ड जीतने के चांस होंगे, वहीं अगर हार भी मिली तो भी सिल्वर तो आ ही जाएगा। भारतीय हॉकी का एक वक्त में एकछत्र राज हुआ करता था। भारत ने ओलंपिक के इतिहास में सबसे ज्यादा 8 गोल्ड हॉकी में ही जीते हैं। हालांकि साल 1980 के बाद स्तर लगातार कम होते चला गया और कुछ साल तो ऐसे भी आए, जब भारत ने ओलंपिक के लिए क्वालीफाई ही नहीं किया। अब पुराने दिन आने की आहट सुनाई देने लगी है। हो सकता है कि भारत फिर से गोल्ड जीतकर करीब 44 साल पुराने इतिहास को दोहरा दे। 

भारत ने साल 1980 में आखिरी बार जीता था हॉकी में गोल्ड 

भारत ने आठ ओलंपिक गोल्ड में से आखिरी बार साल 1980 में मॉस्को में जीता था। अब पेरिस में उसके पास 44 साल बाद इतिहास रचने का मौका है। सेमीफाइनल जीतने पर भी भारत का सिल्वर मेडल तो पक्का हो जाएगा, जो आखिरी बार भारत ने साल 1960 में रोम में जीता था। ब्रिटेन के खिलाफ भारत ने करीब 40 मिनट दस खिलाड़ियों के साथ खेला, क्योंकि अमित रोहिदास को रेडकार्ड दिखाया गया था। रोहित पर एक मैच का प्रतिबंध लगाया गया है, यानी वे सेमीफाइनल में भी भारतीय टीम के हिस्सा नहीं बन पाएंगे। हॉकी इंडिया ने हालांकि इसके खिलाफ अपील की है। माना जा रहा है कि मैच शुरू होने से पहले ही इस पर फैसला आ जाएगा। रोहिदास की गैरमौजूदगी भारत को पेनल्टी कॉर्नर में भी खलेगी। 

पेनाल्टी शूटआउट में भारत ने दी थी ग्रेट ब्रिटेन को पटकनी 

ब्रिटेन के खिलाफ क्वार्टर फाइनल में दस खिलाड़ियों तक सिमटने के बावजूद भारतीय टीम ने जिस साहस और कौशल का प्रदर्शन करके मुकाबला पेनल्टी शूटआउट तक खींचा, वह काबिलेतारीफ है। टोक्यो ओलंपिक के कांस्य पदक मैच में जर्मनी की पेनल्टी बचाकर भारत को 41 साल बाद पदक दिलाने वाले नायक श्रीजेश एक बार फिर जीत के सूत्रधार बने। उन्होंने शूटआउट में ब्रिटेन के दो शॉट बचाए और इससे पहले निर्धारित समय के भीतर भी ब्रिटेन ने 28 बार भारतीय गोल पर हमला बोला और दस पेनल्टी कॉर्नर बनाए, लेकिन महज एक सफलता मिली। श्रीजेश का यह आखिरी टूर्नामेंट है और उन्हें स्वर्ण पदक के साथ विदा लेना चाहेंगे। श्रीजेश ने मैच के बाद कहा कि जब मैदान पर उतरे हैं तो दो ही विकल्प थे। यह मेरा आखिरी मैच हो सकता था या मेरे पास दो मैच और खेलने के मौके होते। अब मेरे पास दो मैच और खेलने के मौके हैं। 

भारतीय टीम ने लीग चरण में हारा केवल एक ही मुकाबला 

भारतीय हॉकी टीम का इस साल के ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन रहा है। भारत के ग्रुप में ऑस्ट्रेलिया और बेल्जियम जैसी टीमें थीं, लेकिन इसके बाद भी भारत ने क्वार्टर फाइनल में नंबर दो की टीम ही हैसियत से एंट्री की। भारत को केवल बेल्जिमय से हार मिली, वहीं अर्जेंटीना से मैच बराबरी पर खत्म हुआ, बाकी सभी मुकाबले टीम इंडिया जीतने में कामयाब रही। अब भारतीय टीम गोल्ड मेडल से केवल दो कदम की दूरी पर है। जहां एक ओर भारत का मुकाबला सेमीफाइनल में जर्मनी से होगा, वहीं दूसरे सेमीफाइनल में स्पेन और नीदरलैंड्स की टीमें एक दूसरे से भिड़ेंगी। यानी अगर भारतीय टीम अपना मुकाबला जीतने में कामयाब होती है तो स्पेन और नीदरलैंड्स में से कोई टीम फाइनल में मिल सकती है। ऐसे में उसे भी हारकर गोल्ड टीम इंडिया जीत सकती है। 

(pti inputs)

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