अपना घर खरीदने का सपना कई लोगों का होता है। वो सपना पूरा भी कर लेते हैं, लेकिन कुछ लोगों की जीवन भर की कमाई एक घर खरीदने में लग जाती है। अगर किसी व्यक्ति के जीवन भर की कमाई कहीं खर्च हो रही है तो वह सही और सुरक्षित हो इसकी हरसंभव कोशिश रहती है। घर के मामले में कुछ ऐसे उदाहरण सामने आए हैं कि खरीदने के कुछ दिन बाद आए भूकंप में घर जमींदोज हो गए। अगर आप भी नए घर खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं तो सबसे पहले उस घर के बारे में हमारे द्वारा बताए जा रहे तरीकों से जांच कर लें। ताकि भूकंप आने पर आप और आपका ड्रीम होम सुरक्षित रहे।
ऐसे लगाएं पता
सरकार के तरफ से कुछ स्ट्रक्चरल जाँच के नियम बनाए गए हैं, जो घर को भूकंपरोधी होने का प्रमाण देते हैं। इसकी मदद से आप पता लगा सकते हैं कि आपका घर भूकंपरोधी है या नहीं। ये तीन बातें आपको इसके बारे में पता लगाने में मदद करेंगी।
- घर के बार में पता करें कि क्या भवन का निर्माण और डिजाइन भारतीय भवन कोड के अनुसार किया गया है या नहीं।
- रजिस्टर्ड आर्किटेक्ट या स्ट्रक्चरल इंजीनियर से भूकंपीय डिजाइन कंप्लायंस सर्टिफिकेट मांगें, जिसने इमारत को डिजाइन किया है।
- किसी इंजीनियर से बात कर वहन परीक्षण कराएं, ताकि घर की मजबूती के बारे में पता लग सके।
क्यो आता है भूकंप ?
धरती के भीतर स्थित प्लेटें जब आपस में टकराती है तो धरती हिलती है। हमारी धरती 12 टैक्टोनिक प्लेटों पर स्थित है। जब ये प्लेटें आपस में टकराती है तो इनमें से ऊर्जा पैदा होता है। फिर ये ऊर्जा भूकंप के रूप में बदल जाते हैं। इसके अलावा हर साल धरती की कुछ प्लेटों में खिसकने की प्रक्रिया होती रहती है। इससे भी हमें भूपंक के झटके महसुस होते रहते हैं।
भूकंप का केंद्र क्या होता है?
जमीन की सतह के नीचे जहां पर चट्टानें आपस में टकराती या टूटती है, उस जगह को भूकंप केंद्र कहा जाता है। वहीं साइंस की भाषा में कहें तो धरती के केंद्र को भूकंप के सेंटर से जोड़ने वाली रेखा जिस जगह पर धरती की सतह को काटती है, उसे भूकंप का सेंटर माना जाता है।
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