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Hindi News मध्य-प्रदेश केंद्रीय मंत्री ने ऑफिस के बाहर लगाया पोस्टर-पैर छूना सख्त मना, ऐसा किया तो नहीं होगी सुनवाई

केंद्रीय मंत्री ने ऑफिस के बाहर लगाया पोस्टर-पैर छूना सख्त मना, ऐसा किया तो नहीं होगी सुनवाई

केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार खटीक ने ऑफिस के बाहर पोस्टर लगवाकर पैर छूने के लिए मना किया है। उन्होंने इसके पीछे की वजह भी बताई है और कहा है कि जिसने भी पैर छुए, उसकी सुनवाई नहीं होगी।

Virendra Kumar- India TV Hindi Image Source : INDIA TV वीरेंद्र कुमार खटीक

टीकमगढ़: मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री वीरेंद्र कुमार खटीक ने ऑफिस के बाहर ऐसा पोस्टर लगवाया है, जिसकी हर तरफ चर्चा हो रही है। दरअसल उन्होंने पोस्टर में पैर छूने की परंपरा को बदलने की कोशिश की है और लिखा है कि पैर छूना सख्त मना है। पैर छूने वालों के काम की सुनवाई नहीं की जाएगी।

क्या है पूरा मामला?

टीकमगढ़ में केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार खटीक ने ऑफिस के बाहर पोस्टर लगवाकर पैर छूने की परंपरा को बदलने की कोशिश की है। उनके ऑफिस के बाहर पोस्टर पर साफ तौर पर लिखा है कि जिसने पैर छुए, उसके काम की सुनवाई नहीं की जाएगी। पैर छूना सख्त मना है।

दरअसल मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री वीरेंद्र कुमार खटीक अपनी सादगी और सरलता की वजह से चर्चा में रहते हैं। उन्होंने लगातार आठवीं बार चुनाव में जीत हासिल की थी। केंद्र में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय मैं कैबिनेट मंत्री के तौर पर वह अपनी भूमिका निभा रहे हैं। उन्हें पीएम मोदी का काफी करीबी भी माना जाता है।

टीकमगढ़ सीट से वह लगातार चौथी बार सांसद चुने गए थे। अपने क्षेत्र में जब वह रहते हैं तो लोगों से मिलकर उनकी समस्याएं सुनते हैं। अपने संसदीय क्षेत्र टीकमगढ़ में इन्होंने अपने ऑफिस के बाहर एक पोस्टर चश्पा किया है, जिसमें साफ तौर पर उन्होंने पैर छूने वालों से नाराजगी जाहिर की है।

उन्होंने पोस्टर में लिखा है कि पैर छूना सख्त मना है और जो भी हमारे पैर छुएगा, उसके काम की सुनवाई नहीं की जाएगी। इसलिए अब लोग मंत्री के पैर छूने से भी कतराने लगे हैं। कई बार तो स्थिति ऐसी बनती है कि जो कोई पैर छूने की कोशिश करने लगता है तो मंत्री उनके ही पैर छूने लगते हैं। उनका कहना है कि हम जनता की बदौलत ही बने हैं और हम यह भेदभाव मिटाना चाहते हैं।

केंद्रीय मंत्री का बयान आया सामने

केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार खटीक ने कहा कि जनता का सम्मान जनप्रतिनिधियों को रखना चाहिए। मैंने तय किया कि जो लोग भी मेरे घर आएं, वह मेरे पैर नहीं पड़ें। ये मानवीय नहीं है और अच्छा नहीं लगता। सिर्फ माता-पिता और पुजारी के पैर पड़ना चाहिए। इसीलिए मैंने अपने दफ्तर में लिखवा दिया है कि पैर छूना सख्त मना है और जो भी हमारे पैर छुएगा, उसके काम की सुनवाई नहीं की जाएगी।