धर्म डेस्क: नवरात्र के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा की जाती है। इन्हें अष्टभुजा भी कहा जाता है। माना जाता है कि इन्होने ब्रह्मांड की रचना की। जब सृष्टि में चारों ओर अंधकार था और कोई भी जीव-जंतु नही था। तब मां ने सृष्टि का रचना की। इसी कारण इन्हें कुष्मांडा देनी के नाम से जाना जाता है।
कौन है मां कुष्मांडा
कुष्मांडा का संस्कृत में अर्थ है कुम्हडे। इसके अलावा इसका मतलब है कि अपनी मंद (फूलों) सी मुस्कान से सम्पूर्ण ब्रहमाण्ड को अपने गर्भ में उत्पन्न किया है वही है मां कुष्माण्डा है। ज्योतिष में मां कुष्मांडा का संबंध बुध ग्रह से है
मां कुष्माण्डा की उपासना से भक्तों के समस्त रोग-शोक मिट जाते हैं। इनकी भक्ति से आयु, यश, बल और आरोग्य की वृद्धि होती है। मां कुष्माण्डा अत्यल्प सेवा और भक्ति से प्रसन्न होने वाली हैं।
शुभ मुहूर्त
चौते दिन मां की पूजा सुबह 7 बजे से 11 बजकर 20 मिनट तक करना शुभ माना गया है। आप चाहे तो 11 बजकर 20 मिनट में पूजा की शुरुआत कर सकते है। इसका आपको फल मिलेगा।
ऐसे करें पूजा
दुर्गा पूजा के चौथे दिन माता कुष्मांडा की पूजा सच्चे मन से करना चाहिए। फिर मन को अनहत चक्र में स्थापित करने हेतु मां का आशीर्वाद लेना चाहिए।
सबसे पहले सभी कलश में विराजमान देवी-देवता की पूजा करें फिर मां कुष्मांडा की पूजा करें। इसके बाद हाथों में फूल लेकर मां को प्रणाम कर इस मंत्र का ध्यान करें।
सुरासम्पूर्णकलशं रूधिराप्लुतमेव च. दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु।
फिर मां कुष्मांडा के इस मंत्र का जाप करें।
या देवी सर्वभूतेषु मां कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
मां की पूजा के बाद महादेव और परमपिता ब्रह्मा जी की पूजा करनी चाहिए। इसके बाद मां लक्ष्मी और विष्णु भगवान की पूजा करें।
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