नई दिल्ली: हिंदू धर्म के पंचाग के अनुसार हर साल सौर पौष को खर मास कहते है। जिसे मलमास या फिर काली रात भी कहा जाता है। मलमास आज से यानी कि 16 दिसंबर से शुरू हो गए है। इस मास में भगवान की पूजा और दान-पुण्य करने से विशेष लाभ मिलता है।
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ज्योतिचार्यों के अनुसार खरमास 16 दिसंबर को दोपहर 2:40 मिनट से शुरू हकर पूरें एक महिनें यानी 14 जनवरी पौष शक्ल पक्ष पंचमी को आधी रात 1: 25 मिनट सो खत्म होगे। इस दिन मकर संक्राति भी होगी। इन दिनों के बीच कोई भी शुभ काम नही होगा। शुभ काम 15 जनवरी से शुरू होगा। एक महीने शादी, ग्रह प्रवेश, व्यापार मुहूर्त, पजन कार्य, मुंडन आदि कुछ भी नही किया जाएगा।
देशाचार के अनुसार नवविवाहिता कन्या भी खर मास के अन्दर पति के साथ संसर्ग नहीं कर सकती है और उसे इस पूरे महीने के दौरान अपने मायके में आकर रहना पड़ता है।
खलमास मनाने के पीछें क्या है कारण जानिए
मार्कण्डेय पराण में इस बारें में विस्तार से बताया गया है। जो एक पौराणिक कथा है। इसमें माना जाता है कि खरमास के खर को गधा कहा जाता है।
एक बार सूर्य अपने साथ घोड़ों के रथ में बैठकर ब्रह्मांड की परिक्रमा करता है। रास्तें में सातों धोड़े साल भर दौड़ लगाते-लगाते प्यास से तड़पने लगे। उनकी इस दयनीय स्थिति से निपटने के लिए सूर्य एक तालाब के निकट अपने सातों घोड़ों को पानी पिलाने के लिए रुकने लगे।
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