'शक्तिमान' और 'जूनियर जी' से पहले ही भारत को मिला था पहला सुपरहीरो, लेकिन नकाब के पीछे थी खूबसूरत हसीना
भारत में सुपरहीरो फिल्मों का दौर 80 और 90 के दशक से पहले ही आ गया था। जी हां, भारत में सालों पहले ही सुपरहीरो फिल्म बन गई थी। इस फिल्म का क्रेज भी 'शक्तिमान' और 'जूनियर जी' से कम नहीं था और फिल्म ने बॉक्स ऑफिस हिट रही थी।
बच्चों तो क्या बड़ों को भी सुपरहीरो फिल्में और सीरीज काफी पसंद आती हैं, यही वजह रही की टीवी शो 'शक्तिमान' और 'जूनियर जी' छोटे पर्दे पर इतने सफल रहे। बॉलीवुड में भी कई सुपर हीरो फिल्में बनती रहीं, फिर चाहे वो 'कृष' हो या 'मिस्टर इंडिया' और 'अजूबा'। इन सभी फिल्मों में सुपर पावर का कमाल देखने को मिला, जो खास तौर पर बच्चों और युवाओं को उत्साहित कर देता था। कहते हैं कि एक दौर था जब बच्चे मार्वल नहीं बल्कि 'शक्तिमान', 'जूनियर जी' और 'कृष' जैसे सुपहीरो बनने की ख्वाहिश करने लगे थे। अब एक बार फिर 'शक्तिमान' की वापसी होने जा रही है, इसका ऐलान भी मुकेश खन्ना ने कर दिया है, लेकिन इससे इतर क्या आप भारत के पहले सुपरहीरो के बारे में जानते हैं? अगर आपको इसका जवाब 'शक्तिमान' लगता है तो आप बिल्कुल गलत हैं।
तो ये था भारत का पहला सुपरहीरो शो
'शक्तिमान' भारत का सबसे पॉपुलर सुपरहीरो जरूर है, जिसने 90's के बच्चों को सुपरहीरो का अलग दौर दिखाया जो मर्वल की फिल्मों से बिल्कुल अलग था, लेकिन ये शो भारत का पहला सुपरहीरो शो नहीं था। इससे पहले ही भारत में सुपरहीरो की दुनिया का आगाज हो चुका था। चलिए आपको मिलवाते हैं पहले इंडियन सुपरहीरो से जो एक परुष नहीं बल्कि महिला थी और साल 1935 में ही भारत को उसका पहला सुपरहीर दिया था। इसे देखते हुए ये कहा जा सकता है कि भारती सिनेमा उस दौर में आज के दौर से भी ज्यादा प्रोग्रेसिव थी और 'शक्तिमान' के छोटे पर्दे पर आने से कई दशक पहले ही भारत को उसका पहला सुपरहीरो मिल गया था।
पहले ही आ गया था बॉलीवुड में सुपरहीरो दौर
लोगों को लगता है कि भारत में सुपरहीरो का दौर हॉलीवुड में 'बैटमैन' और 'सुपरमैन' के बनने के बाद आया या मार्वल कॉमिक्स की स्थापना से पहले भारतीय सिनेमा को इस कॉन्सेप्ट का पता नहीं था, लेकिन ये सोचना सरासर गलत है क्योंकि भारतीय सिनेमा में सुपरहीरो फिल्म का निर्माण सालो पहले ही हो चुका था। साल 1935 और बॉम्बे के वाडिया मूवीटोन के होमी वाडिया एक स्वैशबकलर लेकर आ रहे थे, जिसे हॉलीवुड के मास्क ऑफ जोरो का जवाब माना जा रहा था। यह फिल्म 'हंटरवाली' थी, जो एक राजकुमारी के बारे में एक एक्शन फिल्म थी। इस फिल्म का मुख्य किरदार अपराध से लड़ने के लिए एक नकाबपोश के रूप में काम करती है। इस फिल्म हीरोइन नादिया थीं जो छुईमुई हसीना कम हीरो ज्यादा थीं। फिल्म के पोस्टर पर उनकी निडर छवि पेश की गई थी।
करती थी दमदार स्टंट
नादिया मूलरूप से ऑस्ट्रेलियाई थी और भारत में एक स्टंटवुमन के रूप में उबरी थीं। वो भारत में ही पली-बढ़ी थीं। नादिया ने फिल्म में अपने सभी स्टंट किए, जिसमें घुड़सवारी, चाबुक का इस्तेमाल और यहां तक कि कुछ भारी-भरकम लड़ाई के दृश्य भी शामिल थे। फिल्म को बहुत धूमधाम से रिलीज किया गया था और यह एक जबरदस्त हिट रही थी, जिसने नादिया को भारतीय सिनेमा की सबसे शुरुआती और सबसे लोकप्रिय स्टंट अभिनेत्री बना दिया था। 'हंटरवाली' की सफलता ने नादिया को बॉलीवुड में चर्चा का विषय बना दिया था। साल 1930 के दशक में उन्हें कई अन्य स्टंट फिल्मों में कास्ट किया गया, जिनमें से कई में उन्होंने नकाबपोश किरदार निभाए।
इन फिल्मों में किया काम
नादिया की सफल फिल्मों में 'मिस फ्रंटियर मेल' (1936), 'डायमंड क्वीन' (1940) और 'जंगल प्रिंसेस' (1942) शामिल हैं। साल 1943 में, उन्होंने भारतीय सिनेमा की पहली सीक्वल 'हंटरवाली की बेटी' में राजकुमारी माधुरी के रूप में अपनी भूमिका दोहराई। यह भी एक जबरदस्त हिट साबित हुई। नादिया ने कुछ और सालों तक स्टंट फिल्मों में अभिनय करना जारी रखा, जिसके बाद उन्होंने कुछ मुट्ठी भर फिल्मों में चरित्र भूमिकाएं निभाईं। उनकी आखिरी स्क्रीन उपस्थिति 1968 में रिलीज हुई 'खिलाड़ी' में थी। भारतीय सिनेमा में 1980 के दशक तक कई सुपरहीरो फिल्में नहीं देखी गईं, जब अमिताभ बच्चन ने 'तूफान' और 'अजूबा' के साथ इस शैली दोबारा बड़े पर्दे पर जिंदा किया, लेकिन खासा सफल नहीं हुए।